{"_id":"60d6b7d22d0a014fda611383","slug":"doctor-advice-children-not-vaccinated-so-increase-immunity","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"विशेषज्ञों की सलाह: बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगी नहीं, इसलिए बढ़ाएं उनकी इम्युनिटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विशेषज्ञों की सलाह: बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगी नहीं, इसलिए बढ़ाएं उनकी इम्युनिटी
Sat, 26 Jun 2021 11:02 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 26 Jun 2021 11:02 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
बच्चों को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगी, इसलिए अभिभावक बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने की कोशिश करें। ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। इसके पीछे विशेषज्ञों का तर्क है कि तीसरी लहर तक देश में बड़ी संख्या में वयस्क और बुजुर्गों को वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लग जाएगी। ऐसे में बच्चे कोरोना का सॉफ्ट टारगेट बन सकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी तो बच्चे कोरोना ही नहीं, किसी भी बीमारी से बेहतर तरीके से लड़ सकेंगे।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
सब्जियां, फ्रूट जूस और फल भरपूर मात्रा में खिलाएं
डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि वायरस से बचने के लिए इम्युनिटी की मजबूती जरूरी है। शरीर में रोग प्रतिरोक्षक क्षमता कम होंगी, तो बीमारियां ज्यादा होंगी। इसलिए इम्युनिटी की मजबूती के लिए बच्चों को सब्जियां, फ्रूट जूस और फल भरपूर मात्रा में खिलाने की जरूरत है। साथ ही सब्जियों और फलों का शूप उनके लिए बेहद फायदेमंद है। बच्चों को धूप में भी थोड़ी देर बैठने के लिए कहे। यदि बच्चों की खान-पान की आदत अच्छी होगी तो बीमारियां और कोरोना वायरस से बच्चें बचेंगे। जबकि कुपोषित बच्चों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि वायरस से बचने के लिए इम्युनिटी की मजबूती जरूरी है। शरीर में रोग प्रतिरोक्षक क्षमता कम होंगी, तो बीमारियां ज्यादा होंगी। इसलिए इम्युनिटी की मजबूती के लिए बच्चों को सब्जियां, फ्रूट जूस और फल भरपूर मात्रा में खिलाने की जरूरत है। साथ ही सब्जियों और फलों का शूप उनके लिए बेहद फायदेमंद है। बच्चों को धूप में भी थोड़ी देर बैठने के लिए कहे। यदि बच्चों की खान-पान की आदत अच्छी होगी तो बीमारियां और कोरोना वायरस से बच्चें बचेंगे। जबकि कुपोषित बच्चों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा प्लस
- फोटो : iStock
इसलिए लगाया जा रहा है अनुमान
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में डेल्टा वैरिएंट के बाद डेल्टा प्लस का नया वैरिएंट सामने आ गया है। इस वैरिएंट पर लगातार शोध चल रहे हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। इसके अलावा लोग अब बेपरवाह हो गए हैं और बच्चों बाजारों में लेकर जा रहे हैं। जबकि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में डेल्टा वैरिएंट के बाद डेल्टा प्लस का नया वैरिएंट सामने आ गया है। इस वैरिएंट पर लगातार शोध चल रहे हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। इसके अलावा लोग अब बेपरवाह हो गए हैं और बच्चों बाजारों में लेकर जा रहे हैं। जबकि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना का नया वैरिएंट
- फोटो : iStock
वैरिएंट की नहीं हो सकी है जानकारी
जिले में अब तक किसी वैरिएंट ने तबाही मचाही है। इसकी जानकारी अब तक नहीं हो सकी है। जबकि पांच बार सैंपल भेजे जा चुके हैं। ऐसे में अगर कही डेल्टा प्लस वैरिएंट निकला तो शहर की मुश्किलें बढ़ेंगी। ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत बच्चों को हो सकती है। क्योंकि इन्हें कोई वैक्सीन नहीं लगा है।
जिले में अब तक किसी वैरिएंट ने तबाही मचाही है। इसकी जानकारी अब तक नहीं हो सकी है। जबकि पांच बार सैंपल भेजे जा चुके हैं। ऐसे में अगर कही डेल्टा प्लस वैरिएंट निकला तो शहर की मुश्किलें बढ़ेंगी। ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत बच्चों को हो सकती है। क्योंकि इन्हें कोई वैक्सीन नहीं लगा है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कारगार है शासन से बनाई गई दवा की किट
डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि शासन की ओर से चार श्रेणियों में दवा की किट बनाई गई हैं। यह किट बच्चों के इलाज के लिए बेहद कारगार है। अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग दवाएं शामिल की गई है। आइवरमेक्टिन बच्चों को लोग शुरू से देते आए हैं। यह किसी तरह से कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह दवा बच्चों को कीड़ी मारने के लिए दी जाती रही है। यह दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को दी जाती है। जबकि शासन ने छह से 12 साल के बच्चों के लिए आइवरमेक्टिन को शामिल किया है। इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन भी बच्चों को दी जाती रही है।
डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि शासन की ओर से चार श्रेणियों में दवा की किट बनाई गई हैं। यह किट बच्चों के इलाज के लिए बेहद कारगार है। अलग-अलग श्रेणियों में अलग-अलग दवाएं शामिल की गई है। आइवरमेक्टिन बच्चों को लोग शुरू से देते आए हैं। यह किसी तरह से कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह दवा बच्चों को कीड़ी मारने के लिए दी जाती रही है। यह दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को दी जाती है। जबकि शासन ने छह से 12 साल के बच्चों के लिए आइवरमेक्टिन को शामिल किया है। इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन भी बच्चों को दी जाती रही है।