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हर तरफ मातम: पलक झपकते ही सूना हो गया इस शख्स के घर का आंगन, परिवार के पांच लोगों की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा
Tue, 10 Aug 2021 03:29 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 10 Aug 2021 03:29 PM IST
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एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के फुलवरिया गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। हादसे के चौथे दिन भी गांव में सन्नाटा पसरा है। घटना के बारे में सोचकर हर किसी की रूह कांप जा रही है।
सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
पलक झपकते ही सूना हो गया पतरू का आंगन... गांव में छाया मातम
पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां खत्म हो गईं। घर की बहू और चार मासूमों की मौत की खबर गांव में जिसने भी सुनी, आंखें डबडबा गईं। छत्तीसगढ़ में रह रहे मासूम बच्चों के बाबा पतरू को जब मौत की खबर मिली तो दहाड़े मारकर रोने लगे। बिलखते हुए बोले कि मेरा तो पूरा संसार उजड़ गया।
पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां खत्म हो गईं। घर की बहू और चार मासूमों की मौत की खबर गांव में जिसने भी सुनी, आंखें डबडबा गईं। छत्तीसगढ़ में रह रहे मासूम बच्चों के बाबा पतरू को जब मौत की खबर मिली तो दहाड़े मारकर रोने लगे। बिलखते हुए बोले कि मेरा तो पूरा संसार उजड़ गया।
हादसे के बाद कार से शव निकालने पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला।
घायल पिता को भी पत्नी और बच्चों की मौत की खबर से रविवार शाम तक अंजान रखा गया था। क्योंकि उनकी भी हालत नाजुक बनी हुई थी। वहीं सोमवार को जब हादसे के बारे में उन्हें पता चला तो रो-रो कर उनका बुरा हाल हो गया। गांव के मुकेश विश्वकर्मा, शेषमणि जायसवाल, गौतम कन्नौजिया, मोहन कुमार का कहना है कि बच्चों से आस पड़ोस के लोगों का खास लगाव था। जब भी आते थे, खेलते-कूदते थे। अब ऐसा नहीं होगा। घर-आंगन सूना हो गया है।
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मृतक मासूम बच्चों की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
पिछले 20 वर्षों से रखते हैं ताजिया
ग्रामीणों के मुताबिक घायल महेश मोदनवाल के पिता पतरू पिछले 20 वर्षों से मोहर्रम का ताजिया रखते हैं। वह परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग हो गए तो परिजनों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
ग्रामीणों के मुताबिक घायल महेश मोदनवाल के पिता पतरू पिछले 20 वर्षों से मोहर्रम का ताजिया रखते हैं। वह परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग हो गए तो परिजनों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
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हादसे के बाद गांव में मातम।
- फोटो : अमर उजाला।
फुलवरिया गांव के शेषमणि जायसवाल, मोहन कुमार, कृष्णा मोदनवाल व गौतम कुमार ने बताया कि 20 वर्ष पहले पतरू सड़क हादसे में घायल हो गए। परिजनों से मन्नत मांगी और कहा कि पतरू के ठीक होने पर ताजिया रखेंगे। ठीक हुए तो ताजिया रखने का सिलसिला चल पड़ा। इस बार भी ताजिया रखने आ रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।