फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना का खौफ: पिता का शव घर में रखकर 20 घंटे तक बेसुध पड़ी रही बेटी, अपनों ने छोड़ा साथ, आजाद ने आगे बढ़ाया हाथ

Sat, 01 May 2021 03:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 01 May 2021 03:39 PM IST
विज्ञापन
Daughter funeral of father with help of Azad Pandey and his team in gorakhpur
मटरू का अंतिम संस्कार करते आजाद पांडेय व उनके सहयोगी। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पादरी बाजार के 70 वर्षीय मटरू को क्या पता था कि मरने के बाद उनके शव को कफन भी पहनाने कोई नहीं आएगा। गुरुवार दोपहर अचानक उनकी मौत हुई। बीस घंटे तक बेटी शव लेकर बेसुध पड़ी रही। शुक्रवार को सूचना पाकर पहुंचे आजाद पांडेय व उनकी टीम ने न सिर्फ कफन का इंतजाम किया, बल्कि अंतिम संस्कार भी किया। संवेदनहीनता की हद तब पार हो गई जब शव को कंधा देने न कोई रिश्तेदार पहुंचता न ही कोई पड़ोसी। 
Daughter funeral of father with help of Azad Pandey and his team in gorakhpur
चिता सजाते आजाद पांडेय व उनके सहयोगी। - फोटो : अमर उजाला।
यह ह्रदय विदारक घटना गुरुवार को दोपहर करीब दो बजे की है। मटरू लाल अपनी बेटी के साथ रहते थे। बेटी के पति की भी मौत हो गई है। मटरू बीमार थे और घर पर ही अचानक बेहोश हो गए। कुछ देर में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
Daughter funeral of father with help of Azad Pandey and his team in gorakhpur
मटरू के शव को कंधा देते आजाद पांडेय व उनके सहयोगी - फोटो : अमर उजाला।
बेटी मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन पड़ोसी तमाशबीन बने रहे। दरअसल, लोगों को आशंका थी कि मटरू कोरोना संक्रमित थे। बरामदे में शव रखकर बेटी रिश्तेदारों से लेकर परिचितों तक गुहार लगाती रही, लेकिन कोई नहीं आया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Daughter funeral of father with help of Azad Pandey and his team in gorakhpur
अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
अकेले वह अंतिम संस्कार भी कैसे करती। मोहल्ले के किसी व्यक्ति ने स्माईल रोटी बैंक के आजाद पांडेय को शुक्रवार की सुबह फोन किया। उसे कुंडी खटकाओ अभियान के तहत मोबाइल नंबर मिला था। सूचना पाकर आजाद अपनी टीम के साथ घर पहुंचे। पहले उन्होंने कफन खरीद कर मंगवाया और उसके बाद तख्ती बनवाकर लाए। शव को खुद उठाकर गाड़ी में रखा और श्मशान घाट ले गए। 
विज्ञापन
Daughter funeral of father with help of Azad Pandey and his team in gorakhpur
अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
आजाद कहते हैं कि लोग दूर से तमाशा देख रहे थे, लेकिन कोई पास नहीं आया। श्मशान घाट पर भी लाश को जलाने के लिए लंबी लाइनें लगी थी, तब उन्होंने बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी सोनू से संपर्क साधा। सोनू ने अधिकारियों से बात कर उनकी मदद की और तब जाकर समय से अंतिम संस्कार हो सका।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed