बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस के वैरिएंट में लगातार हो रहे बदलाव की वजह से कोविड जांच में नतीजे सही नहीं मिल रहे हैं। बदल रहे वैरिएंट की वजह से कई मामलों में एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। ऐसे मरीजों की संख्या बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि ऐसे मरीजों का इलाज कोविड संदिग्ध मानते हुए किया जा रहा है।
कोरोना अलर्ट: वैरिएंट में बदलाव से नहीं पकड़ में आ रहे मरीज, डॉक्टर बोले- 'जरा-सी लापरवाही से जा सकती है जान'
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प्राचार्य ने बताया कि संभावित तीसरी लहर से पहले कॉलेज की तैयारी पूरी हो चुकी है। 300 बेड के कोविड वार्ड को सक्रिय कर दिया गया है। मौजूदा समय में चार संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि दो कोविड मरीज भर्ती हैं।
100 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड है तैयार
प्राचार्य ने बताया कि संभावित तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा खतरा बताया जा रहा है। इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बनकर तैयार है। राहत की बात यह है कि पिछले चार माह के अंदर एक भी कोविड संक्रमित बच्चा नहीं मिला है। बता दें कि दूसरी लहर में करीब 1400 के आसपास बच्चे कोरोना संक्रमण का शिकार हुए थे।
23 मरीजों की जांच में तीन की रिपोर्ट आई है पॉजिटिव
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में 23 मरीज ऐसे मिले हैं, जिनमें कोविड के लक्षण हैं। इनमें केवल तीन मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पॉजिटिव मरीजों में एक 15 वर्षीय किशोर की मौत हुई है, जबकि 20 मरीज निगेटिव मिले हैं। इन मरीजों का 300 बेड के कोविड अस्पताल में इलाज चला है। इसमें 16 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि चार मरीजों का इलाज चल रहा है।
बीपी और शुगर के मरीज न करें लापरवाही
प्राचार्य ने कहा कि बीपी और शुगर के मरीज बिल्कुल लापरवाही न बरतें। लक्षण मिलते ही जांच कराएं, यह न मानें कि कोविड संक्रमण नहीं है। अगर जांच रिपोर्ट निगेटिव भी आ जाती है तो कोविड प्रोटोकॉल का पालन जरूर करें। चेस्ट का सीटी स्कैन जरूर कराएं। जरा-सी लापरवाही से जान जा सकती है।