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डॉक्टर की सलाह: घर पर दे रहे हैं ऑक्सीजन तो पल्स, बीपी पर भी रखें नजर, भूलकर भी न करें अनदेखी

Sat, 08 May 2021 12:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 08 May 2021 12:05 PM IST
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corona patient will give oxygen at home doctor advice regarding precautions
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
कोविड ग्रस्त किसी मरीज को यदि घर पर ही ऑक्सीजन दी जा रही है तो परिजनों को उनकी हृदयगति और रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए। यदि ऑक्सीजन स्तर बरकरार (मेनटेन) है, लेकिन हृदयगति लगातार बढ़ रही है या रक्तचाप कम हो रहा है तो यह स्थिति मरीज के लिए ठीक नहीं है। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं। यह कहना है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अमित मिश्रा का।
corona patient will give oxygen at home doctor advice regarding precautions
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
डॉ. अमित मिश्रा के मुताबिक कोविड मरीजों में ऑक्सीजन सेचुरेशन (रक्त ऑक्सीजन अनुपात) दो तरह से कम होता है। पहला फेफड़ों में मौजूद वायुकोष्ठिकाएं (एल्विओलाई) ठीक से फैल और सिकुड़ (स्पाज्म) नहीं पा रही हों। एल्विओलाई फेफड़े में वह सूक्ष्म कोष्ठक होते हैं, जहां सांस के जरिए ली गई ऑक्सीजन रक्त में मिलती है और रक्त की कार्बनडाई ऑक्साइड बाहर निकलती है। एक स्वस्थ मनुष्य के फेफड़ों में करीब 4800 लाख एल्विओलाई होती हैं। ऐसे मरीज को ऑक्सीजन देने पर रक्त में ऑक्सीजन का सेचुरेशन हो जाता है और मरीज ठीक होने लगता है। उसकी हृदयगति और रक्तचाप (बीपी) भी सामान्य हो जाता है। दूसरी स्थिति यह है कि जिसमें कोविड मरीज को लंग्स फाइब्रोसिस (फेफड़ों के ऊतक क्षतिग्रस्त होना) होने लगता है। ऐसे मरीज को केवल ऑक्सीजन देने से लाभ नहीं होगा। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। लंग्स फाइब्रोसिस फेफड़ों की स्थायी क्षति की तरह है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
कैसे करें लंग्स फाइब्रोसिस की पहचान
डॉ. अमित मिश्रा के अनुसार यदि किसी मरीज का रक्त ऑक्सीजन स्तर (एसपीओ2) ऑक्सीजन देने पर बरकरार है और उसकी हालत में सुधार हो रहा है, तो यह सामान्य है। लेकिन, ऑक्सीजन दिए जाने के बावजूद लगातार एसपीओ2 स्तर कम हो रहा है तो यह लंग्स फाइब्रोसिस की ओर इशारा है। इसके साथ ही यदि मरीज की हृदयगति (पल्स रेट) प्रति मिनट सौ से अधिक लगातार रह रही है या बढ़ रही है तो यह फेफड़ों के स्थायी नुकसान का संकेत है। हृदयगति बढ़ने के बावजूद ऐसे मरीज का रक्तचाप (बीपी) भी लगातार गिरे तो तुरंत ही अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। यह सभी लक्षण लंग्स फाइब्रोसिस के हैं। उन्होंने कहा कि घर पर ऑक्सीजन देने वाले परिजन अक्सर यह भूल करते हैं कि वह सिर्फ एसपीओ2 स्तर ही देखते हैं। स्तर गिरने पर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते जाते हैं, जिससे ऑक्सीजन का स्तर बरकरार तो दिखता है, लेकिन मरीज को स्थायी नुकसान हो जाता है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिय
क्या है एसपीओ2
साधारण शब्दों में एसपीओ2 का अर्थ है रक्त में ऑक्सीजन की संतृप्ता। दरअसल रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कणिकाएं शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। रक्त में मौजूद कितनी लाल रक्त कणिकाएं ऑक्सीजन ले जा रही हैं और कितनी लाल रक्त कणिकाएं ऑक्सीजन नहीं ले जा रही हैं, इसके अनुपात को ही एसपीओ2 कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का एसपीओ2 95 दिखा रहा है इसका अर्थ है कि रक्त में मौजूद कुल रक्त कणिकाओं की 95 फीसदी ऑक्सीजन ले जा रही हैं और पांच फीसदी नहीं।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : pixabay
घर पर ऑक्सीजन देना सुरक्षित
डॉ. अमित मिश्रा के अनुसार घर पर ऑक्सीजन देना सुरक्षित है, इसमें हाईपरॉक्सिया या ऑक्सीजन विषाक्तता का डर न के बराबर है। बताते हैं कि घर पर डी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर ही उपयोग में लाए जाते हैं। इन सिलिंडर में दस किलोग्राम ऑक्सीजन आती है। यानी इन सिलिंडर से अधिकतम दस किलोग्राम प्रति घंटा तक ही ऑक्सीजन दी जा सकती है। यह सुरक्षित है। हाईपरॉक्सिया तब होता है, जब मरीज को पंद्रह किलोग्राम प्रतिघंटा की दर से ऑक्सीजन दी जाए, वह भी काफी समय तक। यह अस्पतालों में जंबो सिलिंडर (46) से ही हो सकता है, चिकित्सकों की देखरेख में विशेष हालात में इस तरह ऑक्सीजन दी जा सकती है।
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