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मानवता शर्मसार : कोरोना से पिता-पुत्र की मौत देख पड़ोसियों ने बंद कर ली खिड़कियां, छह घंटे तक दरवाजे पर पड़ा रहा शव

Sun, 18 Apr 2021 09:54 AM IST
vivek shukla विवेक शुक्ला, गोरखपुर।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 18 Apr 2021 09:54 AM IST
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corona broken humility father and son died neighbors ignore dead body in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार में कोरोना से पहले पिता फिर शिक्षक बेटे की मौत के बाद मोहल्लेवालों ने धड़ाधड़ अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर ली। संक्रमण के चलते शिक्षक के भाई और भतीजे पहले ही दूसरे मोहल्ले में आइसोलेशन में थे। ऐसे में घर पर छह घंटे तक शव पड़ा रहा लेकिन कोई कंधा देने वाला नहीं मिला।
corona broken humility father and son died neighbors ignore dead body in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई
दूसरे मोहल्ले में आइसोलेशन में रह रहे शिक्षक के भाई ने फोन से प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे प्रशासन ने शव वाहन के साथ टीम को भेजा तब शव राप्ती तट पर ले जाया गया। पिता को मुखाग्नि देने वाले बड़े भाई ने ही छोटे भाई का अंतिम संस्कार किया।
corona broken humility father and son died neighbors ignore dead body in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई
इंसानियत को झकझोर देने वाली यह घटना गोरखपुर के रामजानकी नगर की है। 12 अप्रैल को कॉलोनी में रहने वाले रिटायर बिजली कर्मचारी की मौत हो गई। परिवार के मुताबिक उनकी रिपोर्ट निगेटिव थी लेकिन लक्षण कोरोना वाले ही थे। ऐसे में शिक्षक बेटे ने अपनी और दोनों भाइयों व बच्चों की 11 अप्रैल को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच कराई जिनकी रिपोर्ट पिता की मौत के एक दिन बाद पॉजिटिव आई थी। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद परिवार होम आइसोलेशन में था।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
इस सदमे से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था कि गुरुवार की देर रात शिक्षक की हालत बिगड़ गई। शुक्रवार तड़के संक्रमित भाई और भतीजे उन्हें ऑटो से एचएन सिंह चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत बताया। यहां से उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए जहां कोविड हॉस्पिटल के सामने एंबुलेंस ड्यूटी में तैनात टेक्नीशियन ने भी मृत बताया तब सुबह करीब सात बजे शव लेकर घर आ गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
शव देखते ही देखते ही आसपास के घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद हो गईं। दोपहर तक शव घर पर ही पड़ा रहा। कांधा देने के लिए चार लोग भी नहीं मिले। इस बीच कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले विजय श्रीवास्तव को इसकी जानकारी हुई। भाई के संक्रमित होने से खुद को आइसोलेट करने वाले विजय ने फोन से प्रशासनिक अफसरों को सूचना दी। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे प्रशासन ने शव वाहन के साथ टीम को भेजा तब शव राप्ती तट पर ले जाया गया। पिता को मुखाग्नि देने वाले बड़े भाई ने ही छोटे भाई का अंतिम संस्कार किया।
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