गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना और स्वाइन फ्लू की जांच एक ही सैंपल से हो सकेगी। मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने यह फैसला लिया है। दोनों की जांच के लिए नाक या गले का स्वाब ही लिया जाता है। इससे मरीजों का समय और रुपये दोनों बचेंगे। मल्टीप्लेक्स किट के जरिए यह जांच होगी। जबकि अभी दोनों जांच के लिए अलग-अलग किट का प्रयोग करना पड़ता था। इसके लिए मरीजों को एक हजार रुपये के आसपास खर्च करने पड़ते थे। एक साथ जांच होने से मरीजों की 400 रुपये की बचत होगी।
जानकारी के मुताबिक, कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में करीब 50 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए। साथ ही हजारों की रिपोर्ट निगेटिव आई। निगेटिव रिपोर्ट आने वालों में भी कइयों में बुखार के लक्षण थे।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
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ऐसे में लोगों की स्वाइन फ्लू की जांच भी की गई। इसके लिए मरीजों का दूसरी बार नमूना लेना पड़ा। इस परेशानी को देखते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने फैसला लिया है कि अब एक ही नमूनों के जरिए कोरोना और स्वाइन फ्लू की जांच की जाएगी।
इस बीच अगर कोविड की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो मरीज का इलाज कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया जाएगा। जबकि निगेटिव आने पर स्वाइन फ्लू की जांच उसी नमूने से ही हो जाएगी।
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स्वाइन फ्लू
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दोनों की जांच में लगते हैं पांच से छह घंटे
कोरोना की जांच हो या स्वाइन फ्लू की। दोनों की जांच में पांच से छह घंटे का समय लगता है। कुल मिलाकर अलग-अलग जांच में करीब 10 से 11 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन एक ही किट के जरिए आरटीपीसीआर जांच में यह समय घटकर छह से सात घंटे हो जाएगा। साथ ही आरटीपीसीआर मशीन में एक साथ 92 नमूने जांच की जा सकती है।
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कोरोना वायरस।
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माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश कुमार सिंह ने कहा कि मल्टीप्लेक्स किट के जरिए एक साथ कई बीमारियों की जांच हो सकती है। कई शहरों में इस किट से जांच की भी जा रही है। अब मेडिकल कॉलेज में भी एक साथ दो जांच की जाएगी। इससे समय के साथ-साथ मरीजों के खर्च और विभाग का भी समय बचेगा।