कोरोनावायरस के खौफ के बीच जिस सेनिटाइजर की मांग खासी बढ़ गई है, उसके अधिक इस्तेमाल को डॉक्टर सेहत के लिए खतरा बता रहे हैं। इससे लीवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। डॉक्टर सेंटेड (महकने वाले) सेनिटाइजर के इस्तेमाल से बचने की सलाह दे रहे हैं।
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मास्क पहने घूमते लोग।
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डॉक्टरों का कहना है कि जिस सेनिटाइजर में इथाइल एल्कोहल का प्रतिशत अधिक हो, उसका ही इस्तेमाल किया जाए. वह भी बेहद कम मात्रा में। एम्स के डॉक्टर अमित रंजन ने बताया कि सेनिटाइजर का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सेनिटाइजर त्वचा की सतह से खून तक पहुंचकर मांसपेशियों और स्कीन को नुकसान पहुंचा सकता है।
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coronavirus
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बाजार में उपलब्ध सेनिटाइजर में अगर कोई केमिकल है तो उसके अलग-अलग दुष्प्रभाव पड़ते हैं। त्वचा में खुजली और जलन होने की आशंका अधिक रहती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि सेंटेड सेनिटाइजर के अधिक इस्तेमाल से लीवर, किडनी, फेफड़े पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे सेनिटाइजर में एल्कोहल की मात्रा कम होती है, जो वायरस को नहीं मार पाती है।
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- फोटो : अमर उजाला।
उन्होंने बताया कि सेनिटाइजर में 60 से 70 प्रतिशत तक एल्कोहल होता है, जो साधारण वायरस को तो नष्ट कर देता है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग कई बार सेनिटाइजर लगाने के बाद उन्हीं हाथों से खा लेते है, जो हमारे शरीर में मौजूद अच्छे वायरस को खत्म कर देता है। इसकी वजह यह है कि इसमें क्लोरहेक्सिडिन होता है, जो हमारे आंतों में मौजूद अच्छे वायरस को भी मार देता है।
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मास्क पहने युवतियां।
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सेनिटाइजर लगाने के बाद उन हाथों से कुछ भी न खाएं
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि सेनिटाइजर का इस्तेमाल डॉक्टर इसलिए ज्यादा करते हैं, क्योंकि उन्हें ऑपरेशन करना होता है। वह बार-बार हाथों को धो नहीं सकते हैं। डॉक्टर सेनिटाइजर के उपयोग के बाद हाथ जरूर धोते हैं। कोरोनावायरस को देखते हुए मौजूदा समय में लोग सेनिटाइजर लगाकर खा भी ले रहे हैं, जो कि शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। ऐसे में कम से कम सेनिटाइजर का उपयोग करें और खाने से पहले अपने हाथों को साबुन से धोएं। इससे बेहतर उपाय और कुछ नहीं हो सकता है।