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सीएम योगी ने गोरखनाथ का 'युवराज' बनने से कर दिया था इनकार, जानिए किस वजह से भरी थी 'हांमी'

Fri, 05 Feb 2021 03:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 05 Feb 2021 03:34 PM IST
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CM yogi adityanath life story with gorakhnath temple in gorakhpur
ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ व योगी आदित्यनाथ।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

यह कहानी सीएम योगी आदित्यनाथ और महंत अवैद्यनाथ की पहली मुलाकात की है। बात अक्तूबर 1993 की है, महंत अवैद्यनाथ दिल्ली एम्स अस्पताल में हृदयरोग विभाग में इलाज करवा रहे थे। इस दौरान संक्षिप्त निंद्रा में अपनी आंख खोली तो देखा, सामने योगी खड़े थें। उनके चेहरे पर फीकी मुस्कान दौड़ पड़ी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...



 

CM yogi adityanath life story with gorakhnath temple in gorakhpur
योगी आदित्यनाथ के साथ महंत अवैद्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

उनकी आंखें, हालांकि अभी भी वही सवाल पूछ रही थीं, जो उन्होंने कुछ महीने पहले ही पौढ़ी के इस युवा से पूछी थी, 'क्या तुम मेरे शिष्य बनोगें?' उस समय योगी ने विनम्रता पूर्वक इनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था।




 

CM yogi adityanath life story with gorakhnath temple in gorakhpur
गोरक्ष पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ, महंत अवैद्यनाथ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

महंत को एक शिष्य की शिद्दत से तलाश थी, जो उनका उत्तराधिकारी बन सके और उनकी अनुपस्थिति में उनके नाम पर मंदिर प्रशासन का संचालन कर सके। दिग्विजयनाथ मात्र 48 साल के थे  जब उन्होंने अवैद्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। परन्तु अवैद्यनाथ 74 साल की उम्र में भी यह कर पाने में सफल नहीं हो सके थे।

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CM yogi adityanath life story with gorakhnath temple in gorakhpur
गोरमहंत अवैद्यनाथ, महंत दिग्विजय नाथ(फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

महंत अवैद्यनाथ को अपनी कहानी याद आ गई, जब 52 साल पहले उन्होंने भी अपने गुरू महंत दिग्विजयनाथ का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। हालांकि थोड़े समय बाद ही कहानी बदलनी वाली थी। कुछ समय बाद अजय को पता चला कि अवैद्यनाथ फिर से अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर हैं। इस बार वो अपने आप को नहीं रोक सके।

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CM yogi adityanath life story with gorakhnath temple in gorakhpur
योगी आदित्यनाथ के साथ महंत अवैद्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

अजय अस्पताल में मंहत अवैद्यनाथ के बिस्तर के पास खड़े थे, महंत आशा भरी निगाहों से उन्हें देख रहे थे। उन्होंने कहा कि मैंने अपना जीवन रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया है, किन्तु अपना शिष्य नहीं चुन सका हूं। अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या होगा?
 

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