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यह बीमारी बच्चों का दिल कर रहा कमजोर, इन लक्षण को देखते ही डॉक्टर से करें संपर्क

Wed, 20 Jan 2021 07:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 20 Jan 2021 07:40 PM IST
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Childrens heart weak due to rheumatic fever
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अगर आपके बच्चे को बुखार के साथ जुकाम है और यह काफी दिनों से ठीक नहीं हो रहा, तो तत्काल डॉक्टर से मिलें। यह लक्षण रूमेटिक फीवर का भी हो सकता है। जरा सी लापरवाही से रुमेटिक हार्ट डिजीज (वाल्व बदलना या छल्ला डालना) में तब्दील हो सकता है। रुमेटिक फीवर के 90 प्रतिशत मामले हर महीने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहुंच रहे हैं। इनमें 30 प्रतिशत बच्चों को हार्ट डिजीज की परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।



 

Childrens heart weak due to rheumatic fever
BRD medical college - फोटो : अमर उजाला

मेडिकल कॉलेज में बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया, रूमेटिक फीवर बच्चों के लिए काफी नुकसानदायक है। इसकी चपेट में आनेवाले 80 फीसदी मरीजों का वॉल्व रिकवर हो जाता है। लेकिन इस बीच अगर दवा छोड़ दी जाए तो मरीज के दिल में कई तरह की समस्याएं आ जाती हैं। स्थिति सर्जरी कराने तक पहुंच जाती है। अगर सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो बच्चे रूमेटिक हार्ट डिजीज के शिकार हो जाते हैं। ऐसे मरीज बीआरडी में इलाज के लिए पहुंच भी रहे हैं। बताया कि हर माह करीब 90-100 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 30 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनको सर्जरी की जरूरत पड़ रही है।

 

Childrens heart weak due to rheumatic fever
हार्ट - फोटो : pixaby

हार्ट डिजीज में होती है यह परेशानी
डॉ. अनीता ने बताया कि सही समय पर अगर बेहतर इलाज नहीं हुआ तो रूमेटिक हार्ट डिजीज की परेशानी बच्चों को हो सकती है। ऐसे मरीजों में जरूरत के मुताबिक वॉल्व बदलने या छल्ला डालने के लिए सर्जरी होती है। बताया कि जो बच्चे एक बार रूमेटिक फीवर की चपेट में आ जाते हैं उनके दिलों की नसों में कमजोरी आ जाती है। इसकी वजह से ऐसे बच्चों को पूरी उम्र दवाएं खानी पड़ती हैं।

 

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Childrens heart weak due to rheumatic fever
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

यह हैं लक्षण
बुखार के साथ गले में लगातार खराश, सांस फूलना, त्वचा पर लाल चकत्ते, छाती में दर्द, हाथों पैरों में झनझनाहट, दर्द और कंधे में झटका लगना, दिल की धड़कन तेज होना, बुखार के साथ लंबे समय तक जुकाम बना रहना आदि इस बीमारी के लक्षण हैं।

गर्मियों में बढ़ जाते हैं मरीज
डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। गर्मियों में ऐसे मरीजों का इजाफा हो जाता है। साफ-सफाई न होने की वजह से बच्चे बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोकस चपेट में आ जाते हैं। इसकी वजह से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में अगर बच्चे बीमार होते हैं तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही अगर दवा चल रही है तो जब तक डॉक्टर न कहें तब तक दवा बंद बिल्कुन न करें।

 

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Childrens heart weak due to rheumatic fever
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

वॉल्व खराब होने का भी खतरा
जिला अस्पताल में ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि रूमेटिक हार्ट डिजीज के 15 से 20 मरीज जिला अस्पताल में हर महीने पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों के परिजनों को सलाह दी जा रही है कि वह दवा बिल्कुल न बंद कराएं। अगर मरीज दवा बंद कर देंगे तो उनका वॉल्व खराब हो जाने का खतरा है। यह वॉल्व वनवे डोर की तरह काम करने लगेंगे। इसकी वजह से ह्दय द्वारा पंप किए जाने वाले खून का प्रवाह शरीर के केवल एक हिस्से में होगा। इसके बाद परेशानियां बढ़ेंगी और हार्ट खराब हो सकता है।

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