लॉकडाउन में मंदी की मार से उबरे चिकन करोबार को अब बर्ड फ्लू का झटका लग रहा है। इससे पोल्ट्री फार्म से लेकर चिकन कारोबारी तक परेशान हैं। वहीं चिकन के शौकीन भी सेहत को लेकर ज्यादा सजग हैं। हालत यह है कि पहले के मुकाबले इन दिनों चिकन की खपत कम हो गई है। रेट गिराने के बाद भी ग्राहकों का रूझान कम हैं। उधर, पशुपालन विभाग की ओर से बर्ड फ्लू को देखते हुए पहले ही सतर्कता बरतने का निर्देश दिया जा चुका है।
मंदी से उबरे चिकन कारोबार को बर्ड फ्लू का झटका, यहां मुर्गे का दाम हुआ आधा
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यूपी के महराजगंज जिले में 16 पोल्ट्री फार्म ऐसे हैं, जिनकी क्षमता प्रति फार्म 10 की हजार है। वहीं तीस हजार की क्षमता का एक पोल्ट्री फार्म है। इसके अलावा सभी ब्लॉक में करीब 50 छोटे बड़े मुर्गी फार्म हैं। बर्ड फ्लू के कारण लोगों की सतर्कता से चिकन का कारोबार घटकर आधा रह गया है।
छातीराम के चिकन विक्रेता अकबर अली बताते हैं कि अभी तक किसी भी पोल्ट्री में बर्ड फ्लू से बीमार मुर्गी सामने नहीं आई है, लेकिन दूसरे पक्षियों के मरने और मीडिया में बर्ड फ्लू की खबरों के चलते चिकन खाने वालों में खौफ पैदा हो गया है। पहले हर रोज करीब 35 से 40 किलो चिकन बिकता था। लेकिन अब मुश्किल से पूरे दिन में 20 किलो बिक रहा है। पहले रेट भी 220 रुपये प्रति किलो था। लेकिन रेट प्रति किलो 100 से 120 के बीच है।
बर्ड फ्लू से बचाव के लिए छोड़ा चिकन
शास्त्री नगर के रहने वाले सुमित वर्मा ने बताया कि बर्ड फ्लू को देखते हुए इन दिनों चिकन खाना बंद कर दिया है। जब इसका खतरा कम होगा तो देखा जाएगा। क्योंकी थोड़ी सी लापरवाही मुश्किल में डाल सकती है। वहीं अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि चिकन तो मेरा पंसदीदा था। लेकिन अब नहीं है। अगर बर्ड फ्लू का प्रभाव हुआ तो सेहत खराब हो जाएगी। ऐसे में कुछ दिन तो परहेज करना ही पड़ेगा।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवध बिहारी ने बताया कि चार तहसीलों में त्वरित कार्रवाई दल (रैपिड रिस्पांस टीम) का गठन किया है। जिसमें पशु चिकित्सक एवं पशुधन प्रसार अधिकारी शामिल हैं। टीम के सदस्य क्षेत्र में रोग से बचाव को लेकर पशुपालकों को जागरुक करने में लगे हैं। रैपिड रिस्पांस टीम के कार्यों के पर्यवेक्षण के लिए चौक के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएन भट्ठ को नोडल अधिकारी बनाया गया है।