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अभी न बैंड-बाजा न ही बारात, कोरोना की मार से ध्वस्त हुआ शादियों से जुड़ा कारोबार
Mon, 27 Apr 2020 11:41 AM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 27 Apr 2020 11:41 AM IST
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gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
एक दशक पहले रणवीर सिंह और अनुष्का शर्मा की एक फिल्म आई थी 'बैंड-बाजा और बारात'। जिसमें इस व्यवसाय के बदलते ट्रेंड को दिखाया गया था। लेकिन कोरोना संकट में बदलते ट्रेंड की क्या बात करें पूरा व्यवसाय ही खत्म हो गया है। अब न तो बैंड बाजा है और न ही बाराती। सिर्फ रस्में अदा करने के लिए घर के दो-तीन लोग, एक पंडित और एक नाऊ।
सौरभ पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला।
गारमेंट: चौपट हो गया कारोबार
गोलघर मेंस वियर के सौरभ पांडेय ने बताया कि एक महीने से ज्यादा समय से बाजार बंद हैं। लगन का सीजन भी तेजी से गुजर रहा है। इस वक्त, शेरवानी, लंहगा, इंडो वेस्टर्न, अलग-अलग तरह के सूट, साड़ियों की मांग होती है। होली के बाद ही दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में कपड़े मंगा लिए थे। अच्छी बिक्री की उम्मीद थी।
सभी कपड़े वैसे ही दुकानों में सजे हुए हैं। कोरोना संकट से हाल फिलहाल में निजात की उम्मीद नहीं दिख रही। कपड़ों की डिजाइन और फेब्ररिक हर साल बदल जाती है। ऐसे में गारमेंट का कारोबार तो बहुत प्रभावित होगा।
गोलघर मेंस वियर के सौरभ पांडेय ने बताया कि एक महीने से ज्यादा समय से बाजार बंद हैं। लगन का सीजन भी तेजी से गुजर रहा है। इस वक्त, शेरवानी, लंहगा, इंडो वेस्टर्न, अलग-अलग तरह के सूट, साड़ियों की मांग होती है। होली के बाद ही दुकानों पर पर्याप्त मात्रा में कपड़े मंगा लिए थे। अच्छी बिक्री की उम्मीद थी।
सभी कपड़े वैसे ही दुकानों में सजे हुए हैं। कोरोना संकट से हाल फिलहाल में निजात की उम्मीद नहीं दिख रही। कपड़ों की डिजाइन और फेब्ररिक हर साल बदल जाती है। ऐसे में गारमेंट का कारोबार तो बहुत प्रभावित होगा।
gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
सजावट: हर तरफ से मिल रही निराशा
फूल व्यवसाई प्रमुख जितेंद्र सैनी ने बताया कि गर्मी के सीजन में लगन के दौरान शहर में करीब 50 लाख से अधिक कारोबार होता है। कोलकाता से फूल सजाने वाले कारीगर बुलाए जाते हैं। वे ही मंडप, शादी का स्टेज, दुल्हे की गाड़ी की सजावट करते हैं।
एडवांस दिया जा चुका था, शादियों की तिथि आगे खिसकने से बड़ा नुकसान हुआ है। सभी बुकिंग कैंसल हो गई हैं। कुछ शादियां हुईं जहां सिर्फ घरवाले ही थे। ऐसे में सजावट कौन करवा रहा है। धार्मिक सत्संग, बड़े आयोजन, कथा, रैलियों पर भी रोक है। ऐसे में फूलों का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
फूल व्यवसाई प्रमुख जितेंद्र सैनी ने बताया कि गर्मी के सीजन में लगन के दौरान शहर में करीब 50 लाख से अधिक कारोबार होता है। कोलकाता से फूल सजाने वाले कारीगर बुलाए जाते हैं। वे ही मंडप, शादी का स्टेज, दुल्हे की गाड़ी की सजावट करते हैं।
एडवांस दिया जा चुका था, शादियों की तिथि आगे खिसकने से बड़ा नुकसान हुआ है। सभी बुकिंग कैंसल हो गई हैं। कुछ शादियां हुईं जहां सिर्फ घरवाले ही थे। ऐसे में सजावट कौन करवा रहा है। धार्मिक सत्संग, बड़े आयोजन, कथा, रैलियों पर भी रोक है। ऐसे में फूलों का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
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पंकज गोयल।
- फोटो : अमर उजाला।
सराफा: दो सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित
गोरखपुर सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि सोने-चांदी की सबसे ज्यादा खरीदारी वैवाहिक कार्यक्रमों में ही होती है। हालात को देखते हुए बहुत से लोगों ने शादियों की तिथि बदलवा ली हैं। दुकानें बंद भी हैं। ऐसे में चाहकर भी कोई खरीदारी नहीं कर सकता।
आभूषण बनाने वाले कारीगर घर बैठे हुए हैं। इसी में अक्षय तृतीय भी निकल गया। कम से कम दो सौ करोड़ का सराफा कारोबार में कारोबार प्रभावित हुआ है। ठंड के सीजन में भी कम ही दिन शादी का मुर्हूत है। मुझे लगता है कि साल भर कोरोना का प्रभाव रहेगा।
गोरखपुर सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि सोने-चांदी की सबसे ज्यादा खरीदारी वैवाहिक कार्यक्रमों में ही होती है। हालात को देखते हुए बहुत से लोगों ने शादियों की तिथि बदलवा ली हैं। दुकानें बंद भी हैं। ऐसे में चाहकर भी कोई खरीदारी नहीं कर सकता।
आभूषण बनाने वाले कारीगर घर बैठे हुए हैं। इसी में अक्षय तृतीय भी निकल गया। कम से कम दो सौ करोड़ का सराफा कारोबार में कारोबार प्रभावित हुआ है। ठंड के सीजन में भी कम ही दिन शादी का मुर्हूत है। मुझे लगता है कि साल भर कोरोना का प्रभाव रहेगा।
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विनीत अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला।
मैरेज हाउस: 800 से ज्यादा बुकिंग कैंसल
मैरेज हाउस एसोसिएशन सदस्य शिप्रा लॉन के निदेशक विनीत अग्रवाल ने बताया कि पूरे शहर में छोटे-बडे़ मिलाकर कुल 400 मैरेज हाउस हैं। सीजन में अगर एक मैरेज हाउस में औसतन 20 बुकिंग भी जोड़ लें तो लगभग 800 शादियों की बुकिंग होती है। अब सभी जगहों पर बुकिंग कैसिंल हो गई है।
सर्दी में शादियों का मुहूर्त कम ही दिन है। शादियों के अलावा वलीमा. निकाह भी प्रभावित हुआ है। हमारे यहां मार्च से लेकर अभी तक कोई बुकिंग नहीं हुई है। अगले 30 जून तक भीड़ वाले कार्यक्रम के आयोजन पर रोक है। एक मैरिज हाल से रोजगार के लिहाज से सौ से ज्यादा लोग जुड़े होते हैं, सब इस समय बेकार हैं।
मैरेज हाउस एसोसिएशन सदस्य शिप्रा लॉन के निदेशक विनीत अग्रवाल ने बताया कि पूरे शहर में छोटे-बडे़ मिलाकर कुल 400 मैरेज हाउस हैं। सीजन में अगर एक मैरेज हाउस में औसतन 20 बुकिंग भी जोड़ लें तो लगभग 800 शादियों की बुकिंग होती है। अब सभी जगहों पर बुकिंग कैसिंल हो गई है।
सर्दी में शादियों का मुहूर्त कम ही दिन है। शादियों के अलावा वलीमा. निकाह भी प्रभावित हुआ है। हमारे यहां मार्च से लेकर अभी तक कोई बुकिंग नहीं हुई है। अगले 30 जून तक भीड़ वाले कार्यक्रम के आयोजन पर रोक है। एक मैरिज हाल से रोजगार के लिहाज से सौ से ज्यादा लोग जुड़े होते हैं, सब इस समय बेकार हैं।