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संकट के सिपाही: खुद की जान जोखिम में डाल गैरों की जान बचाने में जुटे रहे ‘धरती के भगवान’, इनकी कहानी जानकर करेंगे सलाम
Fri, 02 Jul 2021 11:29 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 02 Jul 2021 11:29 AM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी टीम के विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह और उनकी टीम।
- फोटो : अमर उजाला।
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कोरोना वायरस के नाम से जब लोग डरे हुए थे, तब बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी की टीम कोरोना के सैंपलों की जांच कर रही थी। दूसरी लहर में ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस ने दस्तक दी तो उसका भी डटकर सामना किया। इस बीच टीम के कई लोग संक्रमित हुए, लेकिन हौसला किसी का नहीं टूटा। इस टीम ने अब तक 8.96 लाख आरटीपीसीआर और 21 हजार ट्रूनेट से जांच की है।
डॉ. अमरेश सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
इसका नतीजा रहा कि सौ से एक हजार सैंपलों की जांच रोज होने लगी। इस बीच संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो दबाव भी बढ़ा। शासन की ओर से मशीनें बढ़ा दी गईं। अब सात हजार जांच प्रतिदिन की जा रही है।
डॉ. अमरेश सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
कोविड से जंग जीती, फिर जुट गए काम में
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि बीएसएल थ्री (बॉयोसेफ्टी लैब) की शुरुआत जब हुई तो उसमें भी टीम ने काफी मेहनत की। हर दिन सात हजार से अधिक सैंपल की जांच करते रहे। इस बीच टीम के कई साथी संक्रमित हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारे। संक्रमण से जंग जीतने के बाद फिर से जांच में जुट गए।
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि बीएसएल थ्री (बॉयोसेफ्टी लैब) की शुरुआत जब हुई तो उसमें भी टीम ने काफी मेहनत की। हर दिन सात हजार से अधिक सैंपल की जांच करते रहे। इस बीच टीम के कई साथी संक्रमित हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारे। संक्रमण से जंग जीतने के बाद फिर से जांच में जुट गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : istock
ब्लैक और व्हाइट फंगस से भी लड़े
कोरोना की दूसरी लहर कुछ कम हुई तो ब्लैक और व्हाइट फंगस ने दस्तक दे दी। इस पर टीम ने काफी मेहनत की और हर दिन 20 से अधिक सैंपलों की जांच की। जबकि इसमें दो-दो बार जांच करनी पड़ती थी। आखिर जांच क्लचर एंड सेंसटिविटी में 12 घंटे से अधिक का समय लगता था। इसमें खतरा भी अधिक था। इसके बावजूद टीम किसी बहादुर जवान की तरह मोर्चे पर डटी रही।
कोरोना की दूसरी लहर कुछ कम हुई तो ब्लैक और व्हाइट फंगस ने दस्तक दे दी। इस पर टीम ने काफी मेहनत की और हर दिन 20 से अधिक सैंपलों की जांच की। जबकि इसमें दो-दो बार जांच करनी पड़ती थी। आखिर जांच क्लचर एंड सेंसटिविटी में 12 घंटे से अधिक का समय लगता था। इसमें खतरा भी अधिक था। इसके बावजूद टीम किसी बहादुर जवान की तरह मोर्चे पर डटी रही।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
इनकी बदौलत लोग जानते रहे अपनी रिपोर्ट
लेक्चरर डॉ जयेश पांडेय, माइक्रोबायोलॉजिस्ट अंकुर चौधरी, प्रतिमा त्रिपाठी, संपरीत कौर, हिमांशु बिष्ट, इंद्रा अधिकारी, उमेश चौधरी, अखिलानंद, देवेंद्र, अभिषेक, चंडी, बृजपाल, अंबरीश, अखिलेश, विवेक, अंकित, अखिलेश, संजय, जगमोहन, चंद्रभान, रंजना रेखा, ओमकार, आकाश, अजय तिवारी और रामलखन की बदौलत लोगों को कोविड की जांच रिपोर्ट मिलती रही।
लेक्चरर डॉ जयेश पांडेय, माइक्रोबायोलॉजिस्ट अंकुर चौधरी, प्रतिमा त्रिपाठी, संपरीत कौर, हिमांशु बिष्ट, इंद्रा अधिकारी, उमेश चौधरी, अखिलानंद, देवेंद्र, अभिषेक, चंडी, बृजपाल, अंबरीश, अखिलेश, विवेक, अंकित, अखिलेश, संजय, जगमोहन, चंद्रभान, रंजना रेखा, ओमकार, आकाश, अजय तिवारी और रामलखन की बदौलत लोगों को कोविड की जांच रिपोर्ट मिलती रही।