जून में लगने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण को ज्योतिषशास्त्री शुभ नहीं बता रहे हैं। बता दें कि पांच जून को चंद्र ग्रहण लगा था। 21 जून को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। एक महीने में दो ग्रहणों के लगने का संयोग भले ही 50 साल के बाद बन रहा है। मगर ज्योतिषियों के मुताबिक ये दुर्लभ खगोलीय संयोग महाभारत की लड़ाई के दौरान भी मौजूद था।
18 दिनों की लड़ाई के दौरान पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण तो 13 दिन के बाद सूर्य ग्रहण लगा था। जो संपूर्ण जगत के लिए शुभ नहीं था। सूर्य ग्रहण के दौरान ही अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने में भी सफलता पाई थी, नहीं तो युद्ध का परिणाम कुछ दूसरा हो सकता था।
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ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र।
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पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि ग्रहण किसी के लिए अच्छा नहीं होता और बात अगर एक ही माह में दो ग्रहण की करें तो ये पूरी दुनिया के लिए समस्या उत्पन्न कर सकते हैं। महाभारत के दौरान भी ऐसा ही हुआ। एक माह में दो ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही महामारी लेकर आते हैं। कोरोना के मामलों में इससे इजाफा होगा।
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solar eclipse
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उन्होंने बताया कि भारत और विश्व के लिए 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील है। मिथुन राशि में होने जा रहे, इस ग्रहण के समय मंगल मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे। जो अशुभ संकेत है। इसी के साथ ग्रहण के समय शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्री स्थिति में रहेंगे। राहु और केतु तो सदैव उल्टी चाल ही चलते हैं तो इस लिहाज से कुल छह ग्रह वक्री रहेंगे। यह स्थिति पूरे विश्व में उथल पुथल मचाएगी।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय।
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पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा जो कि नैसर्गिक माता-पिता बन, आत्मा, शक्ति, शासन, सत्ता पक्ष, प्रेम इत्यादि के द्योतक हैं। उनका संक्रमित होना पूरे जनमानस के लिए खराब साबित होने वाला है। किसी भी तरह का ग्रहण किसी भी व्यक्ति के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। चंद्रमा मन मस्तिष्क व आय के भाव को प्रभावित करता है। संबंधित व्यक्ति की जन्म कुंडली में यह जिस भाव का मालिक होगा उसे प्रभावित करता है। वहीं सूर्य पिता-पुत्र, राज्य सत्ता पक्ष, शारीरिक फल को प्रभावित करेगा। 28 जून तक ग्रहों की स्थिति किसी भी तरह से ठीक नहीं है। ग्रहण से कोरोना का संक्रमण बढ़ेगा।