फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Fashion ›   Know how high heels fashion come up into the fashion

हाई हील्स का फैशन कब और कैसे बन गया सबका फेवरेट

Wed, 20 Jun 2018 03:36 PM IST
फैशन डेस्क, अमर उजाला
फैशन डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 20 Jun 2018 03:36 PM IST
विज्ञापन
Know how high heels fashion come up into the fashion

''अगर आप आदमियों से हील्स और ड्रेस पहनने के लिए सवाल-जवाब नहीं करते हैं तो आप मुझसे भी नहीं कर सकते।'' ट्विलाइट सागा (वही फिल्म जिसमें भेड़िए इंसानों का खून पीते हैं) की हीरोइन क्रिस्टीन स्टीवर्ट मंगलवार को बतौर ज्यूरी कांस फिल्म फेस्टिवल में पहुंची थीं। जब वो रेड कार्पेट पर पहुंची तो खूबसूरत सिल्वर ड्रेस और ब्लैक हाई हील्स पहने हुई थीं। कुछ कदम चलने के बाद जैसे ही सीढ़ियां शुरू हुईं उन्होंने हील्स उतार दीं। उनका इस तरह हील्स उतारना कांस फिल्म फेस्टिवल के 'नो फ़्लैट्स पॉलिसी' के विरोध में था।

विज्ञापन

हालांकि कांस फिल्म फेस्टिवल में इस तरह का ये कोई पहला मामला नहीं है। 2015 में फिल्म प्रोड्यूसर वेलेरिया रिक्टर को हाई हील्स न पहनने की वजह से रोक दिया गया था। बाद में रिक्टर को अंदर जाने की अनुमति मिल गई थी। वेलेरिया की उनकी एक टांग नकली थी और इसीलिए उन्होंने हील्स के बजाय फ़्लैट्स पहन रखे थे।

विज्ञापन

 

सिर्फ कां फिल्म फेस्टिवल ही नहीं...

कुछ साल पहले लंदन में फाइनेंस कंपनी पीडब्ल्यूसी ने एक रिसेप्शनिस्ट को ऊंची एड़ी की सैंडल पहनने से मना करने पर ऑफिस से घर भेज दिया था। जिसके बाद उन्होंने एक मुहिम चलाई थी। जिस पर उन्हें दस हजार से ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला था और सरकार को जवाब देना पड़ा था।

खूनी पैर...

एक ओर जहां ऐसे मामले हैं वहीं 2016 में एक तस्वीर वायरल हुई थी। कनाडा के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाली एक महिला वेटर के खूनी पंजों वाली एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर विवाद को जन्म दिया था।

कहां से आए ये टिक-टॉक हाई हील्स?

हाई हील्स पहनने के कुछ अपने कायदे होते हैं। मसलन, हाई हील पहनकर गीली जमीन, पहाड़ या पथरीली सड़क पर आराम से नहीं चला जा सकता। ऐसे में ये साफ हो जाता है कि इन्हें किसी खास मकसद के लिए ही बनाया गया होगा।ऊंची हील के जूतों को सदियों से घुड़सवारी के जूतों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। ईरान और पर्शिया में अच्छा घुड़सवार होना जरूरी था।

जब घुड़सावार दौड़ते हुए घोड़े से तीर का निशाना लगाता तो यही ऊंची हील उसे घोड़े के रकाब पर पकड़ देती थी। जब 1599 में पर्शिया के शाह अब्बास ने यूरोप में अपने राजदूत भेजे तो उनके साथ ये जूते यूरोप तक जा पहुंचे।

उस वक्त ऐसा माहौल बना कि मानो ये ऊंची हील के जूते ही पुरुषों को मर्द और दिलेर बना सकते हैं।जैसे-जैसे ये शौक रईसों से आम लोगों में पहुंचा, रईसों ने अपने जूतों की हील को बढ़ाना शुरु कर दिया और इसी तरह ऊंची एड़ियों के जूतों का चलन आया। फ्रांस के लूईस चौदंवें महान शासक थे लेकिन उनकी लंबाई सिर्फ पांच फुट चार इंच थी। उन्होंने 10 इंच की हील से अपनी ऊंचाई की कमी को पूरा किया।

आज भले ही ये हील बनाना आसान हो, उस जमाने में इस तरह की हील बनाना एक इंजिनियरिंग चुनौती थी। जब महिलाओं में पुरुषों सा दिखने का फैशन चला तो यही ऊंची हील महिलाओं और बच्चों की पसंद बन गया। महिलाएं पुरुषों की तरह दिखना चाहती थी और ये ऊंची हील के जूते उनकी इस चाहत को बखूबी पूरा कर रहे थे।इस दौरान पुरुषों की हील कम होती चली गई और महिलाओं की हील ज्यादा ऊंची और गोलाइदार होती चली गई। महिलाओं के जूतों की नोक पैनी होती थी ताकि उनके पैर छोटे और पतले लगें।

1740 तक पुरुषों ने ऊंची हील का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। 50 साल बाद ये ऊंची हील के जूते महिलाओं के पैरों से भी गायब हो गए। 19वीं सदी के मध्य में ऊंची हील के जूते वापस फैशन में लौटे। इस दौर में फोटोग्राफी महिलाओं की छवि और फैशन को निर्धारित कर रही थी।

उनकी तस्वीरों से ही ये मान्यता शुरु हुई कि ऊंची हील महिलाओं के उत्तेजक रुप को पेश करने के लिए अहम है और उसके बाद से हील का स्वरूप समय-समय पर बदलता रहा लेकिन उनका वजूद खत्म नहीं हुआ।

 
विज्ञापन

हाई हील्स और सेहत

आम मान्यता है कि हाई हील्स पहनना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है लेकिन बावजूद इसके महिलाएं बड़े शौक से इन्हें पहनती हैं। द स्पाइन हेल्थ इंस्टीट्यूट के मुताबिक हाई हील्स पहनने से रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने, एड़ी और पैर पर बुरा असर पड़ता है।

द सोसायटी ऑफ चिरोपोडिस्ट्स एंड पोडिएट्रिस्ट्स की एक रिसर्च के मुताबिक, हाई हील पहनने से गठिया (अर्थराइटिस) का ख़तरा बढ़ जाता है। जिसमें जोड़ों में दर्द और मांस-पेशियों में ख़िचाव की शिकायत हो जाती है।

पैर से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञ और अर्थराइटिस पर रिसर्च करने वाले प्रोफेसर एंथनी रेडमंड का कहना है कि रोजमर्रा के लिए आगे से गोलाकार और दो से तीन सेंटीमीटर यानी एक इंच हील वाले फुटवियर पहनने चाहिए। साथ ही सोल ऐसे होने चाहिए जो झटके झेल सके।

द स्पाइन हेल्थ इंस्टीट्यूट के मुताबिक चलने या फिर खड़े रहने के लिए शरीर का संतुलित होना जरूरी है। हाई हील पहन लेने पर शरीर को संतुलन बनाने में मुश्किल होती है। हाई हील पहनने पर शरीर का ऊपरी हिस्सा बाहर की ओर आ जाता है। पीठ का निचला हिस्सा आगे आ जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और कूल्हे का संतुलन बिगड़ जाता है। घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पिंडली पर खिंचाव बढ़ जाता है। साथ ही पंजों पर भी दबाव बढ़ जाता है।

क्या हाई हील का होता है मर्दों पर असर?

आमतौर पर रीढ़ की हड्डी अंग्रेजी के अक्षर S के आकार की होती है लेकिन हाई हील पहनने पर यह आकार सामान्य नहीं रह पाता। ऐसे में पीठ दर्द या मांस-पेशियों में खिंचाव आ जाना बेहद सामान्य है।अगर पहन रहे हैं तो किन बातों का ख़्याल रखें?

- बहुत लंबे समय तक हाई हील्स पहनने से परहेज करें।
- पैर की मांस-पेशियों से जुड़ी कसरत करते रहें। पहनने से पहले और उतारने के बाद, दोनों वक़्त।
- बहुत अधिक ऊंची एड़ी की सैंडिल पहनने से बचें।
- जब भी जूते या सैंडिल खरीदें कोशिश करें कि दोपहर के समय ही खरीदें क्योंकि इस दौरान पैर अपने सबसे बड़े आकार में होते हैं।
- प्वॉइंटेड हाई हील्स पहनने से बचें।
- हो सके तो हर रोज अलग-अलग शेप के जूते पहनें। 
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed