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धूप से बचने के लिए करते हैं सनस्क्रीन का इस्तेमाल तो ध्यान में रखें ये बातें

Thu, 24 Sep 2020 10:10 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Thu, 24 Sep 2020 10:10 AM IST
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right way to use sunscreen on skin
त्वचा की देखभाल - फोटो : pixabay

धूप से बचने के लिए अक्सर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। जिससे की सूर्य की खतरनाक अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बचा जा सके। लेकिन क्या ये सनस्क्रीन सच में हमें इन किरणों से बचाते हैं। वहीं कुछ लोग सनसक्रीन का इस्तेमाल नहीं करते। जबकि कुछ का कहना है कि इसके इस्तेमाल से त्वचा का रंग गहरा हो जाता है। तो चलिए जानें क्या हैं ये सनस्क्रीन लोशन लगाने का सही तरीका, जिससे वो त्वचा को फायदा पहुंचाए। 

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त्वचा की देखभाल - फोटो : pixabay

सनस्क्रीन लेते समय सबसे पहला ध्यान जाता है एसपीएफ पर। दरअसल, एसपीएफ एक रेटिंग फैक्टर है, जो बताता है कि कोई सनस्क्रीन क्रीम आपको किस स्तर तक बचाव देती है। दूसरी दुविधा सनस्क्रीन और सनब्लॉक को लेकर है। दरअसल, अल्ट्रावॉयलेट किरणें दो स्तर की होती हैं- यूवीए और यूवीबी। यूवीए किरणें ज्यादा खतरनाक होती हैं। लंबे समय तक धूप में रहने वाले पर यह ज्यादा असर छोड़ती हैं, जबकि यूवीबी किरणें सनबर्न और फोटो एजिंग के लिए जिम्मेदार होती हैं।

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dry skin - फोटो : Pixabay

ऐसे में सनस्क्रीन यूवीबी किरणों को फिल्टर करने का काम करता है, जबकि सनब्लॉक में जिंक ऑक्साइड होता है, जो दोनों तरह की किरणों से त्वचा को बचाता है। भ्रमित होने के लिए एक और फैक्टर आपके सामने होगा। वह है फिजिकल और केमिकल सनस्क्रीन। फिजिकल सनस्क्रीन का अधिकतम एसपीएफ-20 होता है और इसमें केमिकल भी कम होता है।जबकि केमिकल सनस्क्रीन में 20 से ज्यादा एसपीएफ होता है और इसमें ज्यादा मात्रा में केमिकल होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ऐसे में यह ध्यान रखें कि जितना ज्यादा एसपीएफ, उतना ही ज्यादा केमिकल। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि भारत में अल्ट्रावॉयलेट किरणें ज्यादा खतरनाक स्तर की नहीं हैं। इसलिए यहां फिजिकल सनस्क्रीन का यूज काफी है। सनस्क्रीन का चुनाव हमेशा अपनी त्वचा के अनुसार ही करना चाहिए। अधिकतर लोगों की शिकायत होती है कि सनस्क्रीन लगाने के बाद त्वचा का रंग कम और ऑयली हो जाता है, इसलिए वे सनस्क्रीन नहीं लगाते। त्वचा ऑयली तो होगी ही, अगर त्वचा के हिसाब से सनस्क्रीन का चुनाव नहीं हुआ हो तो।

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- फोटो : social media
यदि आपकी त्वचा पहले से ही ऑयली है, तो स्प्रे या जेल बेस्ड सनस्क्रीन यूज करें। यह आपके रोमछिद्रों को बंद नहीं करेगी और त्वचा ऑयली भी नहीं होगी। वहीं ड्राई स्किन के लिए मॉइस्चराइजर बेस्ड सनस्क्रीन सही रहती है। मॉइस्चराइजर वाला सनस्क्रीन का चुनाव करें या त्वचा पर पहले मॉइस्चराइजर लगाएं, फिर सनस्क्रीन लगाएं। अगर सनस्क्रीन लोशन लगाने के बाद बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो चिपचिपाहट से बचने के लिए सनस्क्रीन के साथ थोड़ा लेक्टो-कैलामाइन लोशन मिक्स करें।

 
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