विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में अब तक आपने देखा असुरराज हिरण्यकश्यपु का बेटा प्रह्लाद नारद मुनि से शिक्षा लेकर माता कयादु के साथ महल वापस लौटता है। लेकिन हिरण्यकश्यपु उसे असुरी शिक्षा ग्रहण करने के लिए दैत्य गुरु शुक्राचार्य के आश्रम भेज देता है। जहां प्रह्लाद की शिक्षा आरंभ होती है।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में आज के एपिसोड में आपने देखा असुरराज हिरण्यकश्यपु को इस बात का अंदाजा नहीं होता कि उसका बेटा भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त है लेकिन जब उसे यह ज्ञात होता है तो वह उसके मुख से भगवान विष्णु का नाम भी नहीं सुनना चाहता।
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इसलिए, यह जानने के बाद कि उसका बेटा भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है हिरण्यकश्यपु उसे मारने का प्रयास करता है। प्रह्लाद को मारने का पहला प्रयास हिरण्यकश्यपु के दरबार में ही कयादु की उपस्थिति में किया जाता है। हिरण्यकश्यपु ने अपने मंत्रियों को अपने तलवारों से प्रह्लाद को मारने की आज्ञा दी लेकिन उनका कोई भी हथियार प्रह्लाद के शरीर पर खरोंच भी नहीं लगा पाया।
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इसके बाद, हिरण्यकश्यपु ने अपने एक मंत्री को प्रह्लाद को एक पर्वत के शिखर से धक्का देने के लिए कहा। लेकिन फिर से भगवान विष्णु ने अपने भक्त को बचा लिया। इधर हिरण्यकश्यपु ने अपने एक साथी स्वरभानु की मदद से प्रह्लाद के भोजन में जहर खिलाकर मारने को कहता है। लेकिन इस दौरान भगवान शिव ने प्रह्लाद के भोजन में मिलाए गए विष का सेवन करके प्रह्लाद को बचाया।
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प्रह्लाद सबकुछ छोड़कर जंगल की ओर चल पड़ा। जंगल में भूखा प्यासा रहकर भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। अपनी भक्ति के कारण आगे चलकर वह भगवान विष्णु के प्रिय भक्त के रूप में विख्यात हुआ। बता दें विष्णु पुराण का प्रसारण डीडी भारती पर शाम सात बजे किया जाता है। 'विष्णु पुराण' में किंशुक वैद्य ने प्रह्लाद का किरदार निभाया था।