Hunarbaaz: बिहार के लाला ने जीत लिया 15 लाख का इनाम, टीवी नहीं था तो घरवालों ने पूरा शो मोबाइल पर देख डाला
घर वाले पड़ोस में देखते थे मेरा शो
आकाश सिंह कहते हैं, ‘मुझे ठीक से याद नहीं कि थिएटर में कब कोई फिल्म देखी। मेरे घर की हालत अच्छी नहीं थी। मेरे पापा मामूली से ड्राइवर हैं। बड़ी मुश्किल से घर चलता था। घर में टीवी होने का तो सवाल ही नहीं था। जब भी फिल्में देखने का मन करता तो पड़ोस में जाकर फिल्में देखते थे। मैंने भोजपुरी फिल्मों में अधिकतर रवि किशन की फिल्में देखी हैं। आज भी मेरे घर में टीवी नहीं है। मेरे घर वाले मेरा शो या तो पड़ोस में टीवी पर देखते थे या फिर मोबाइल पर।
आकाश के मुताबिक, ‘पहले तो भोजपुरी फिल्में ऐसे बनती थी कि परिवार के साथ आप फिल्में नहीं देख सकते थे। आज अच्छी और पारिवारिक फिल्में काफी बन रही हैं। थिएटर में तो नहीं लेकिन अपने घरवालों के साथ पड़ोस में टीवी पर कई फिल्में देखी हैं। आज भव्य पैमाने पर तकनीकी रूप से भी अच्छी फिल्में बन रही हैं। आज भोजपुरी के बहुत सारे कलाकार काफी अच्छा काम कर रहे हैं।
इंटरनेशनल शो में काम करने की तमन्ना
आकाश से उनकी किसी ख्वाहिश के अब भी अधूरी होने के बारे में पूछा गया तो वह कहते हैं, ‘वैसे तो मुझे किसी भी भाषा की फिल्म करने से कोई परहेज नहीं। बस मुझे अच्छा लगना चाहिए। मैं बड़े बड़े मेकर्स के साथ फिल्मे करना चाहता हूं। उनकी फिल्मे कोरियोग्राफ करना चाहता हूं। लेकिन मेरी ख्वाहिश है कि में एक इंटरनेशनल शो करूं ताकि अपने घर परिवार और देश का नाम और रोशन कर सकूं।
‘भोजपुरी फिल्मों में जरूर काम करूंगा’
आकाश कहते हैं, ‘जाहिर सी बात है एक बड़े शो का विनर होने के बाद हर तरफ से काम के ऑफर्स मिलने ही लगते हैं। भोजपुरी फिल्में मेरे दिल के बहुत करीब है। अगर मौका मिलेगा तो भोजपुरी फिल्मे जरूर करूंगा। ऐसा किरदार जो मुझे पसंद हो और मेरे दिल के करीब हो।