ऐश्वर्या राय, अनिल कपूर और राजकुमार राव की फिल्म 'फन्ने खान' की रिलीज में बस कुछ ही दिन बचे हैं। पहले तो फिल्म के मेकर्स फिल्म की कमाई को लेकर परेशान थे क्योंकि इसके साथ दो और फिल्में- 'मुल्क' और 'कारवां' रिलीज हो रही हैं। अब उनके सिर पर एक और दबाव आ गया है। वह भी राजनीतिक गलियारे से।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि फिल्म 'फन्ने खान' के निर्माताओं पर पॉलिटिकल प्रेशर डाला गया। वजह है फिल्म का एक गाना जिसके बोल हैं 'मेरे अच्छे दिन कब आएंगे'। करीब एक हफ्ते पहले इस गाने को रिलीज किया गया था। इस गाने के जारी होते ही इसका राजनीतिकरण भी शुरू हो गया।
दरअसल, पिछले आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव अभियान में ''अच्छे दिन'' का प्रमुखता से इस्तेमाल किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के तमाम नेताओं ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था। अब जब अगले साल फिर आम चुनाव होने हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों ने फिल्म के इस गाने को आधार बनाकर केंद्र सरकार के कामकाज की आलोचना शुरू कर दी।
यही नहीं, सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस गाने की आड़ में पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा, उनके चुनावी वादों की खिल्ली भी उड़ाई गई। कुल मिलाकर फिल्म के गाने की वजह से सरकार की खूब किरकिरी हुई। खबर है कि मेकर्स पर इस गाने को हटाने या इसमें परिवर्तन का दवाब डाला गया।
यही वजह है कि अच्छे दिन वाले गाने का नया वर्जन रिलीज किया गया है। इस नए गाने के बोल हैं- 'मेरे अच्छे दिन अब आए रे'। गाने में हुए इस बदलाव पर फिल्म के निर्देशक अतुल मांजरेकर ने 'मिड डे' को दिए इंटरव्यू में कहा, 'गाने का पहला वर्जन रिलीज होते ही कई लोगों ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी के अच्छे दिन वाले वादे का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया था। गाने को बेवहज राजनीतिक रंग दे दिया गया। निर्माताओं को भी कई नामी लोगों की ओर से कॉल आए। वे तो अब मूल गाने को फिल्म से हटाने तक की सोच रहे हैं। '