कुछ चीजें तो अपने बस में होती हैं और कुछ पर बस नहीं चलता। दिल भी ऐसा ही है, ये किसी की नहीं मानता, जिसके सीने में धड़कता है, उसकी भी नहीं। स्कूल, कॉलेज या गली के नुक्कड़ पर खड़े हुए कब कोई खूबसूरत बला आपके दिल में उतर जाती है, पता ही नहीं चलता। कई बार इंसान प्यार को पा लेता है तो कुछ किस्से अधूरे ही रह जाते हैं। प्यार पूरा हो या अधूरा बहुत कुछ सिखा जाता है। हम ऐसी दस फिल्मों के बारे में आपको बता रहे हैं जो हर जवान लड़के-लड़की को देखनी चाहिएं क्योंकि ये रिश्ते बनाना और निभाना दोनों सिखाती हैं।
रोजा 1995 में आई थी। फिल्म में मनीषा कोईराला और शेखर मुख्य भूमिकाओं में थे। हिन्दू-मुस्लिम दंगे और एक मुस्लिम लड़की का हिन्दू लड़के से प्यार, फिल्म में बेहद बेहतरीन ढंग से ये दिखाया गया कि अपने प्यार के लिए दोनों कैसे जूझते हैं। ऐसा अक्सर होता है कि जिस लड़की या फिर लड़के को आप चाहें उसका मजहब और जाति आपसे ना मिलती हो, ऐसे में ये फिल्म आपको देखनी चाहिए।
संजीव कुमार और जया भादुडी की फिल्म 'कोशिश' दिखाती है कि अगर प्यार सच्चा हो तो फिर कोई दीवार आपकी राह में मुश्किल नहीं खड़ी कर सकती। फिल्म में संजीव कुमार और जया भादुड़ी ने गूंगे और बहरे का रोल किया। दोनों को कैसे प्यार होता है और शादी के बाद कैसे दोनों अपने बेटे को पालते हैं, ये सब पर्दे पर आपकी आंखें भिगो देगा।
1959 में आई 'प्यासा' हिन्दी सिनेमा की यादगार फिल्मों में से एक है। फिल्म में एक कोठेवाली से बेरेजगार शायर का इश्क बहुत कुछ कह जाता है। फिल्म दुनिया के दिखावे के बीच सच्चे प्यार के अर्थ को दिखाती है। इस फिल्म के बिना हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री अधूरी है।
सलमान खान की हीरो के तौर पर पहली फिल्म थी 'मैंने प्यार किया'। अपने प्यार की खातिर पहाड़ के पत्थर तोड़ते एक नामी बिजनेसमैन के बेटे को देखकर सिनेमा हॉल में बैठे कई दर्शकों की आंखें नम होती है। प्यार सिर्फ करना नहीं निभाना किसे कहते हैं ये फिल्म में सलमान और भाग्यश्री के किरदार सिखाते हैं।