"मुंबई से ठाकरे ब्रांड को नष्ट करके महाराष्ट्र पर कब्जा करने की साजिश अब सबके समझ में आई है। राज ठाकरे भी इसी ब्रांड का हिस्सा हैं और भविष्य में उन्हें भी इससे समस्या हो सकती है। शिवसेना के साथ उनके मतभेद हो सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ठाकरे ब्रांड ही चलना चाहिए।" शिवसेना नेता संजय राउत ने कंगना रणौत मसले पर राज ठाकरे के लिए ये शब्द लिखे। पिछले कुछ दिनों में अभिनेत्री कंगना रणौत बनाम शिवसेना का विवाद पूरे देश में छाया हुआ है।
कंगना रणौत और शिवसेना का विवाद: राज ठाकरे की चुप्पी के क्या हैं मायने?
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कंगना ने मुंबई पुलिस पर अविश्वास व्यक्त करने के बाद मुंबई को "पीओके" और "पाकिस्तान" तक की उपमा दे डाली, लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने चुप्पी साध रखी है। कंगना ने शिवसेना को खुली चुनौती दी थी कि "मुंबई आने से मुझे रोकने वालों, मुंबई किसी के बाप की नहीं है।" उसके बाद संजय राउत ने उन्हें जवाब दिया कि "मुंबई मराठी मानुष के बाप की है।" भारतीय जनता पार्टी ने कंगना का पक्ष लिया है और महाराष्ट्र के सत्ताधारी शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी कंगना पर टिप्पणी करते आ रहे हैं।
राज ठाकरे चुप क्यों
नए राजनीतिक समीकरण की वजह से राज ठाकरे शांत हैं और सोशल मीडिया पर चर्चा है कि मुंबई और मराठी मानुष के मसले पर अब तक चलने वाली मनसे मुंबई को "पीओके" और "पाकिस्तान" कहने के बाद भी कैसे शांत है। शिवसेना के मुख्यपत्र सामना में संजय राउत ने एक लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने राज ठाकरे का जिक्र करते हुए सवाल उठाया हैं कि मुंबई और महाराष्ट्र की बदनामी होने के समय वो शांत कैसे बैठे हैं।
संजय राउत ने लिखा है, "महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई को ग्रहण लगाने की कोशिश की जा रही है। ये ग्रहण बाहर के लोग लगा रहे हैं। मुंबई को पाकिस्तान और बाबर कहने वालों के पीछे भारतीय जनता पार्टी खड़ी है, ये दुखद है। सुशांत और कंगना के पीछे खड़े होकर भाजपा बिहार में चुनाव लड़ना चाहती है। बिहार में उच्चवर्णीय राजपूत और क्षत्रीय मतों को हासिल करने के लिए ये सब किया जा रहा है। उसके लिए महाराष्ट्र का अपमान हुआ तो भी उनको हर्ज नहीं। ठाकरे और पवार महाराष्ट्र के स्वाभिमान के ब्रांड हैं। मुंबई में से इस ब्रांड को नष्ट करने और महाराष्ट्र पर कब्जा करने की साजिश अब सबको समझ में आ रही है। राज ठाकरे भी इसी ब्रांड का हिस्सा हैं और भविष्य में उन्हें भी इससे समस्या होगी। शिवसेना के साथ उनके मतभेद हो सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में ठाकरे ब्रांड का ही जोर होना चाहिए। जिस दिन ठाकरे ब्रांड खत्म हो जाएगा, उस दिन मुंबई खत्म होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।"
कंगना मसले पर राज ठाकरे दोनों तरफ से घिर गए हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजय राउत ने इस मसले पर राज ठाकरे को घेर लिया है। कंगना की ओर से मुंबई को "पीओके" और "पाकिस्तान" कहने के बावजूद भी राज ठाकरे ने इस पर एक भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। सवाल पूछा जा रहा है कि मुंबई पुलिस और मराठी मानुष के मुद्दे पर आक्रामक रुख रखने वाली मनसे चुप क्यों है? संजय राउत के लेख पर मनसे के नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि जब मनसे को जरूरत थी, तब शिवसेना चुप थी।