देश की आजादी से पहले से भारतीय सिनेमा दर्शकों को एंटरटेन करता आ रहा है। हम भारत का 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं लेकिन भारतीय सिनेमा को स्थापित हुए 100 साल से ज्यादा हो चुके हैं । इन 100 सालों में दर्शकों को ड्रामा, एक्शन, लव स्टोरी और बायोपिक जैसे विषयों पर फिल्में देखने को मिलीं । हिंदी फिल्मों के दर्शक भारत में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में फैले हुए हैं। इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जिन्हें भारत में भले ही उतनी सफलता ना मिली हो लेकिन इन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया है।
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इन फिल्मों में पहला नाम 'संत तुकाराम' का है। यह फिल्म 1937 में रिलीज हुई थी। फिल्म के डायरेक्टर विष्णु पंत धामले और शेख फट्टेलाल थे। यह पहली फिल्म थी जिसे 'वेनिस फिल्म फेस्टिवल' में स्पेशल प्राइज देकर नवाजा गया था ।
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फिल्ममेकर चेतन आनंद की मूवी 'नीचा नगर' को कांस फिल्म फेस्टिवल में Grand Prix du Festival International du Film अवॉर्ड से नवाजा गया था। यह फिल्म 1946 में रिलीज हुई थी।
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1951 में आई वी शांताराम की फिल्म 'अमर भोपाली' को Excellence in Sound Recording का अवॉर्ड मिला था।
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डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1954 में एक जबरदस्त फिल्म 'दो बीघा जमीन' बनाई थी। इस फिल्म को भारत में भी काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म को कई इंटरनेशनल अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। इसके अलावा फिल्म ने कांस फिल्म फेस्टिवल में Prix International का अवॉर्ड जीता था।