देवानंद की मौत पर सो रहा था पूरा इंडिया, खबर आते ही टूट पड़ा दुखों का सैलाब
देव ने 88 साल की उम्र में आखिरी बार दम भरा था। ऐसे में 3 दिसंबर को पुण्यतिथि है। लेकिन देव आज भी अपने फैन्स के दिलों में जिंदा हैं। देव का जन्म 26 सितंबर 1923 को उस वक्त ब्रिटिश भारत के अधीन आने वाले पंजाब के शंकरगढ़ में हुआ था। यह जगह बंटवारे के बाद अब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के क्षेत्र में जा चुकी है।
देव साहब , जी हां इसी नाम से उनके फैन्स उन्हें जाना करते थे। उनका स्टाइल और उनकी फिल्में उनके फैन्स के दिलों में ऐसी छाप छोड़ गए हैं कि वे कभी तन्हाई में तो कभी गम में उनकी ही फिल्मों के दर्दभरे नगमें अकेले में सुनकर अपने दर्द को दिलासा देते हैं।
बॉलीवुड में लिजेंड और कोहिनूर देवसाहब को ही माना जाता है। एक्टर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर इन सब कामों में उन्हें महारत हासिल थीं और उनकी सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने हिंदी सिनेमा मॉर्डन बनाने में सबसे पहले कदम उठाया। हिंदी सिनेमा में नई-नई एक्ट्रेस लांच करने का चलन देव साहब से ही शुरू हुआ था। बचपन से एक्टिंग का शौक रखने वाले देव साहब मिलट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी तक मिली थी लेकिन उन्होंने एक्टिंग के लिए अपनी इस बेशकीमती नौकरी को छोड़ डाला।
अब बात उस पहलू की जिसके लिए देवसाहब को लोग आज भी याद करते हैं। हैंडसमनेस उनकी सबसे पहली पहचान थी। उनके लुक की लड़कियां इतनी दिवानी थी कि उन्हें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। काला कोट और उसपर सफेद रंग की शर्ट यही वो कॉस्ट्यूम था जो आज भी बॉलीवुड में किसी फंक्शन में आसानी से दिख जाता है। देवसाहब का यह लुक इतना पॉपुलर था कि लड़कियां उन्हें देख अपना आपा खो दिया करती थीं। खबर तो यह भी है कि कई लड़कियों ने आत्महत्या तक कर ली जिसके चलते देव साहब को कोर्ट के आदेश के बाद अपना काला कोट-पैंट त्यागना पड़ा।