महेश भट्ट हिंदी फिल्मों के मशहूर निर्माता-निर्देशक रहे हैं। उन्होंने साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'मंजिले और भी हैं' से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने पीछ मुड़कर नहीं देखा और कई शानदार और कालजयी फिल्में बनाईं। उनकी कई फिल्में विवादों में भी रहीं, लेकिन कहानी कहने की अपनी अनोखी क्षमता की वजह से उन्हें काफी पसंद भी किया गया। हालांकि, इन दिनों वह निर्देशन की कमान नहीं संभालते, जिसको लेकर उन्होंने हाल में ही बात की है।
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महेश भट्ट
- फोटो : इंस्टाग्राम @maheshfilm
महेश भट्ट ने अपने करियर में 'जख्म', 'अंगारे', 'नाजायज','सड़क' आदि कई यादगार फिल्में बनाई हैं। बतौर निर्देशक उनकी आखिरी फिल्म 'सड़क 2' थी, जो साल 2020 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उनकी बेटी आलिया भट्ट भी नजर आई थीं। मशहूर निर्देशक ने हाल में ही घोषणा की है कि वो अब फिल्में निर्देशित नहीं करेंगे, क्योंकि वह खुद को अब पुराना मानते हैं और वर्तमान समय के हिसाब उनकी फिल्मों की शैली सही नहीं रहेगी।
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महेश भट्ट
- फोटो : इंस्टाग्राम @maheshfilm
इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह खुलासा किया कि वह अब निर्देशक की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। उनके अंदर अब कई चीजें बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर एक नए युग की शुरुआत है और वो अब इस युग के हिसाब से सटीक नहीं बैठते। उन्होंने इसे अपने जीवन का संतोषजनक पड़ाव बताया। महेश भट्ट के मुताबिक उन्हें खुद फिल्में बनाने की बजाए दूसरे फिल्म निर्माताओं को सलाह देने में संतुष्टि मिलती है।
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आलिया भट्ट-महेश भट्ट
- फोटो : इंस्टाग्राम @maheshfilm
महेश भट्ट का व्यक्तित्व और उनकी फिल्मों का मिजाज काफी अलग रहा है। उनकी कई फिल्में आज के वक्त के हिसाब से भी तर्कसंगत लगती हैं, लेकिन वह खुद को एक विलुप्त ज्वालामुखी के रूप में परिभाषित करते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के जैसे हैं, जिसके पास ज्ञान और जानकारी का खजाना है, लेकिन मनोरंजन की दुनिया में एक स्थायी छाप छोड़ने की कोई इच्छा नहीं है। वह खुद को मौजूदा दौर के हिसाब से काफी पुराना समझते हैं। हालांकि, इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि विक्रम भट्ट और अविका में उन्हें खुद की पहचान बनाने की एक भूख नजर आती है।
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सलीम खान-महेश भट्ट-सलमान खन
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उन्होंने विशेष फिल्म्स की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि विक्रम भट्ट और पूजा भट्ट ने इसमें काफी योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से मानते थे कि फिल्मों में सितारे नहीं फिल्म की गुणवता मायने रखती है। विशेष फिल्म्स के बैनर तले कम लागत और शानदार संगीत वाली फिल्में बनाई गईं, जिसमें सितारों के बजाय अच्छे अभिनेताओं पर ध्यान दिया गया। इस वजह से इमरान हाशमी जैसे अभिनेता स्टार बनें। इसमें आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा बाद में फिल्मों के अंदर सितारों की मांग बढ़ने की वजह से विशेष फिल्म्स को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
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