दशकों बाद देश में नई शिक्षा नीति आई है। केंद्र सरकार के प्रयासों से उसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जोर-शोर से तैयारियां भी की जा रही हैं। यहां तक कि कई राज्यों में इसे लेकर समितियां भी बनाई गईं हैं। लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब सरकारी स्कूल बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएंगे। जब वहां पर्याप्त शिक्षा-संसाधन और सुविधाएं हों, लेकिन पर्याप्त शिक्षा-संसाधन और सुविधाओं की तो बात छोड़ ही दीजिए, देश के सरकारी विद्यालयों में तो पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता ही नहीं है।
देश में खाली पड़े हैं शिक्षकों के 10 लाख पद, बिहार-यूपी में सबसे ज्यादा टोटा, अन्य राज्यों में ये है स्थिति
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बिहार-उत्तर प्रदेश शीर्ष पर
आंकड़ों के अनुसार, इनमें बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्य क्रमश: शीर्ष पायदान पर हैं। यहां सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा सबसे ज्यादा है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 06 लाख 88 हजार 157 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 02 लाख 75 हजार 255 पद खाली हैं। जबकि उत्तर प्रदेश में भी 02 लाख 17 हजार से अधिक पद रिक्त हैं।
शीर्ष पांच में ये राज्य भी
ऐसा नहीं है कि सिर्फ बिहार और उत्तर प्रदेश के ही सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हों। देश के अन्य राज्यों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है, लेकिन वहां रिक्त पदों की संख्या इन दोनों राज्यों के अपेक्षा काफी कम है। खाली पदों के आधार पर शीर्ष पांच राज्यों में झारंखड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल का भी नाम हैं। झारखंड में 95 हजार 897 पद खाली हैं तो मध्य प्रदेश में 91 हजार 972 पदों पर रिक्तियां हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के सरकारी विद्यालयों में 91 हजार 972 शिक्षकों की कमी है।
छग, राजस्थान और आंध्र भी पीछे नहीं
सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों की बात करें तो छत्तीसगढ़, राजस्थान और आंध्र प्रदेश भी दूध के धुले नहीं हैं। यहां भी सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है। शिक्षकों के खाली पदों की शीर्षता सूची में छत्तीसगढ़ छठे, राजस्थान सातवें और आंध्र प्रदेश आठवें पायदान पर हैं। छत्तीसगढ़ में 51 हजार 830, राजस्थान में 47 हजार 666 और आंध्र प्रदेश में 34 हजार 888 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
मिजोरम में एक भी पद खाली नहीं
इन सबके उलट देश का पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम एक ऐसा राज्य है जहां सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों में से एक भी पद रिक्त नहीं है। जबकि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों में से 188 पद खाली हैं तो वहीं लक्षदीप में भी 83 पदों पर रिक्तियां हैं।
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