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साल 2015 में यूं लगी विशेष सत्र की कतार, दिखे जोरदार हंगामे
Tue, 29 Dec 2015 06:58 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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Updated Tue, 29 Dec 2015 06:58 PM IST
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साल 2015 में यूं लगी विशेष सत्र की कतार, दिखे जोरदार हंगामे
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किसी भी राज्य की सरकार और उसकी कार्यप्रणाली विधानसभा पर निर्भर करती है। यहीं जनता के अधिकारों, कर्त्तव्यों और जिम्मेदारियों के लिए नियमों और कानूनों का ककहरा भी तैयार होता है। जाहिर है जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विधानसभा के पास कुछ विशेषाधिकार, शक्तियां और सीमाएं भी हैं। लेकिन अगर ये शक्तियां, सीमाएं और विशेषाधिकार भी कम पड़ जाए तो हालात बेकाबू हो जाते हैं।
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ऐसे ही कई किस्से साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में भी देखने को मिले। विधानसभा में आम सत्र के अलावा लगातार विशेष सत्र भी होते रहे और जबरदस्त बहस भी देखने को मिली। इन सबके बीच हंगामें भी खूब हुए, बात चाहे फिर भाजपा विधायकों को मार्शलों के द्वारा बाहर निकालने की हो या महिला सदस्यों द्वारा विधानसभा स्पीकर पर दबाव बनाने के तरीके की ही क्यों न हो, तो आइए डालते हैं एक नजर साल 2015 में दिल्ली विधानसभा की उन गर्मा-गर्म बहस और विशेष सत्र की जिनसे जमकर हंगामा बरपा।
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केजरीवाल और नजीब की जंग में बुलाया विशेष सत्र-
दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ अपनी तकरार को तेज करते हुए दिल्ली सरकार ने केंद्र की अधिसूचना पर 27 और 28 मई को दिल्ली विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाया। इस अधिसूचना के तहत केंद्र ने नौकरशाहों की नियुक्ति में उपराज्यपाल को पूर्ण शक्ति प्रदान की और स्पष्ट किया कि पुलिस एवं जन व्यवस्था जैसे विषयों पर उन्हें मुख्यमंत्री से बात करने की कोई जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो को भी केंद्र सरकार के अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज करने से रोक दिया गया था।
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अधिसूचना जारी होने के बाद केजरीवाल ने केंद्र पर करारा हमला बोला और विधानसभा में अधिसूचना के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। केजरीवाल ने केंद्र पर पिछले दरवाजे से दिल्ली को चलाने तथा भ्रष्ट लोगों की रक्षा के लिए उपराज्यपाल के पक्ष में खड़ा होकर शहर के लोगों की पीठ में छूरा घोंपने का आरोप लगाया था। विशेष सत्र में विधायक सोमनाथ भारती की तरफ से केंद्र की जारी अधिसूचना को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देने, सांसदों को पत्र लिखे जाने का प्राइवेट मेंबर प्रस्ताव पास कराया। भाजपा विधायकों ने विशेष सत्र में सांकेतिक वॉकआउट किया।
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विजेंद्र गुप्ता की ओर से नियम 114 में निंदा प्रस्ताव के प्रावधान नहीं होने का जिक्र करके स्वीकार नहीं किया गया। प्रस्ताव पास किए जाने के पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अलावा मंत्री गोपाल राय ने केंद्र व उपराज्यपाल पर खूब हमले किए। इसके अलावा प्रस्ताव पर भाजपा के तीन विधायक समेत करीब दो दर्जन विधायकों ने अपनी बात रखी।
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