आज की भागती दौड़ती जिंदगी में शब्दों के मायने क्या होते हैं इसको हर कोई समझना और जानना चाहता है। इसी तलाश में विश्व पुस्तक मेले में शब्दकोश की खरीदारी जमकर यहां आने वाले दर्शक कर रहे हैं। सोमवार को मेले का तीसरा दिन था लेकिन इसके बाद भी महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में पुस्तक मेले में आए और पुस्तकें खरीदीं। इसके अलावा यहां मिल रहे व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
विश्व पुस्तक मेला: आज होगा मेले में खास कार्यक्रम, खूब हो रही उर्दू शब्दकोश की बिक्री
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मीठी जुबान उर्दू के चाहने वाले ज्यादा
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के स्टाल पर उर्दू से हिंदी, हिंदी से अंग्रेजी, दकनी लोगत (उर्दू से दक्षिण भारत की भाषाओं का अनुवाद), अंग्रेजी से उर्दू (2.5 लाख शब्द), फरंग ए आस्फिया (उर्दू से उर्दू), अख्तसर उर्दू और तलफ्फुज की बिक्री खूब हो रही है। तलफ्फुज की बीते तीन दिनों में 40 से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं।
इन शब्दकोशों की बिक्री भी खूब
मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी और श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ ने भी स्थानीय लोककथाओं और इतिहास की लगभग 150-200 प्रतियां बेची है। . पंजाबी अकादमी 176 नई पुस्तकों के साथ पुस्तक मेले में आया है। जिसने अबतक 10 प्रतिशत बिक्री की है। बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी के पास भी अपनी 450 पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है।
राष्ट्रीय पुस्तकालय में जमा हो रही पुस्तकें
राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता के स्टाल पर 100 से ज्यादा पुस्तकें जमा हो चुकी हैं। सभी 600 से ज्यादा प्रकाशकों को एडवाइजरी जारी कर सूचित किया गया है कि वह अपनी नई प्रतियों की कम से कम एक कॉपी राष्ट्रीय पुस्तकालय के स्टाल पर जमा करवा दें। मेले के अंत तक लगभग सभी प्रकाशक उन्हें प्रतियां दे देंगे। ऐसा करना कानूनन अनिवार्य है।
अरब देशों से भारतीय साहित्य का आदान प्रदान बढ़ा
अरब देशों और भारत के बीच साहित्यिक आदान प्रदान का अंदाजा पुस्तक मेले के विदेशी मंडप में देखा जा सकता है। विदेशी मंडप में दो बड़े और खूबसूरत स्टाल में से एक शारजाह तो दूसरा किंगडम ऑफ सऊदी अरब का है। इसके अलावा यहां पर मिस्र, ईरान, अबू धाबी, इंग्लैंड, स्पेन, जर्मन, चीन, श्रीलंका और नेपाल के स्टाल भी हैं लेकिन अरब देशों के स्टालों के आगे सब फीके हैं। विदेशी मंडप में ज्यादातर स्टालों पर विदेशों की संस्कृति, इतिहास और बच्चों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। अरब देशों के स्टाल पर कुरान की 40 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में प्रतियां उपलब्ध हैं। ऐसा करने में वहां के छह विश्वविद्यालयों और शिक्षा मंत्रालय ने सहयोग किया है।
शारजाह के स्टाल पर मौजूद भारत में विदेशी मामलों के कार्यकारी अधिकारी मोहन कुमार ने बताया कि पिछले एक वर्ष में अरबी की 60 पुस्तकों को हिंदी में अनुवाद कर भारत के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा भारत से हर साल हजारों की संख्या में साहित्यिक पुस्तकें अरब के देशों में भेजी जा रही हैं।