केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा का बीस मिनट का वीडियो और दस करोड़ की मांग के बाद नोएडा पुलिस की पांच घंटे की जांच से ब्लैकमेलिंग की साजिश का पर्दा उठ गया। कैलाश अस्पताल के बाहर व अंदर सोमवार दोपहर से शाम तक पांच घंटे तक चर्चाओं का दौर जारी रहा है। शाम करीब 5:45 बजे एसएसपी वैभव कृष्ण, केंद्रीय मंत्री के साथ बाहर निकले तो मामले की जानकार दी।
पांच घंटे की जांच के बाद हुआ पर्दाफाश, ऐसे रची गई थी केंद्रीय मंत्री को ब्लैकमेल करने की साजिश
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चार बड़े नेता थे रडार में
एसएसपी ने बताया कि निशु से पूछताछ की जा रही है। निशु ने स्वीकार किया कि दिल्ली-एनसीआर के हाईफ्रोफाइल चार बड़े नेता उनके गिरोह के रडार पर थे। इनमें सत्ताधारी व विपक्षी दलों के नेता शामिल थे। हालांकि अभी मामला शुरुआती चरण में मामला था। निशु ने बताया कि वह लोग पहले भी इस तरह की ब्लैकमेलिंग कर चुके हैं। उन्होंने उद्योगपति से लेकर बिल्डर व अन्य बड़े लोगों से पैसों की उगाही भी की है।
संगठित गिरोह चलाता है ब्लैकमेलिंग का
एसएसपी के मुताबिक प्रतिनिधि चैनल बंद होने के बाद चैनल मालिक के पास कोई काम नहीं था। उसी दौरान उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी। इसमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। इस गिरोह के लोग पहले पत्रकार बनकर बड़े नेताओं व अन्य लोगों से संपर्क करते हैं और धीरे धीरे ब्लैकमेलिंग पर उतर जाते हैं। इस बार केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा को जब ब्लैकमेल करने का प्रयास किया तो पोल खुल गई।
महिला समाजसेवी देर रात तक महिला थाने में
इस पूरे प्रकरण में नोएडा की एक महिला समाजसेवी का नाम आ रहा है। पुलिस ने महिला समाजसेवी को देर रात तक महिला थाने में बैठा रखा था। महिला समाजसेवी ने अमर उजाला को बताया कि कई महीने से आलोक उनसे केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से मिलवाने के लिए कह रहा था। इसके बाद पिछले महीने उन्होंने आलोक को केंद्रीय मंत्री से मिलवाया। मुझे यह नहीं पता था कि वह केंद्रीय मंत्री का कोई वीडियो बना रहा है। वह आलोक को मिलवाने ले गई थी । इसलिए उनकी तस्वीर भी उस वीडियो में है। इसके बाद पुलिस ने कई घंटे तक पूछताछ की।
आलोक केंद्रीय मंत्री से मांग रहा माफी
इस प्रकरण में महिला पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद आरोपी आलोक ने केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा को फोन किया और माफी की मांग की। आलोक ने केंद्रीय मंत्री से गुजारिश की कि पुलिस ने उसकी मां बहन को पकड़ लिया है। उसे छुड़ा दें।
दो पेज का पत्र और लहजा धमकी भरा
केंद्रीय मंत्री को आलोक ने दो पन्ने का धमकी भरा प्रिंटेड पत्र भेजा था। इस पत्र में दोस्ती से लेकर दुश्मनी की बात कही गई। भ्रष्ट से लेकर अच्छे शख्स होने की बात बताई गई। इसके बाद यह लिखा कि आप मुझसे दोस्ती कर लेंगे तो दोनों फायदे में रहेंगे। बुधवार तक दो करोड़ रुपये दे दीजिए। इसके बाद एक नई कंपनी में केंद्रीय मंत्री को 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी देने की बात कही। इसके लिए 7 से 8 करोड़ रुपये की मांग की गई।
कोडवर्ड को बनाया हथियार
जिस बीस मिनट के वीडियो में महेश शर्मा व अन्य लोग बातचीत करते हुए दिख रहे हैं। इसमें चुनाव प्रचार के लिए वाहनों के इंतजाम करने के साथ वोट दिलाने की बात कही गई है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने कोडवर्ड में बात करने का जिक्र किया। इसी कोडवर्ड शब्द से वह केंद्रीय मंत्री को ब्लैकमेल करने का प्लेटफार्म बनाया। जब इसक वीडियो की जांच की गई तो एसएसपी ने कहा कि वीडियो में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।
पूर्व डीएसपी की भूमिका भी संदिग्ध
इस मामले में चैनल मालिक आलोक, महिला पत्रकार निशु के अलावा एक महिला समाजसेवी के साथ सेवानिवृत्त डीएसपी की भूूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। उगाही करने आई महिला पत्रकार नीशू की जब महिला पुलिसकर्मियों ने तलाशी ली तो उसके पास से स्टिंग करने वाला कैमरा मिला। पुलिस ने कैमरे को जब्त कर लिया है। दरअसल, मार्च में लोकल चैनल के पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने के लिए पूर्व डीएसपी और समाजसेविका ने भी मदद की थी।
अस्पताल के बाहर बढ़ा दी गई थी सुरक्षा
सोमवार दोपहर को जब एसएसपी कैलाश अस्पताल पहुंचे तो थोड़ी देर में कैलाश अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। शहर के सभी कोतवाल समेत एसपी सिटी से लेकर तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए तो अस्पताल के बाहर मीडिया व अन्य लोगों का जमावड़ा लग गया। अस्पताल के अंदर से कोई सूचना नहीं मिल रही थी। तब बाहर तरह तरह के कयास लगने लगे। बाद में जब एसएसपी बाहर निकले तो कयासों का पटाक्षेप हुआ।