अपनी पत्नी और तीन बच्चों को कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर देने के बाद, नींद में उनका गला रेतकर कत्ल करने वाले गाजियाबाद के इंजीनियर की करतूत से हर कोई दहल गया है। लोग यह समझ नहीं पा रहे कि उसके सामने ऐसी कौन सी मजबूरी रही होगी जो उसने अपने जिगर के टुकड़ों को मौत की नींद क्यों सुलाया। इस स्टोरी में जानिए वही मजबूरी जिसने इंजीनियर को ऐसा खौफनाक कदम उठाने पर किया मजबूर...
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बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इंजीनियर सुमित की नौकरी नहीं होने के कारण परिवार काफी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, लेकिन पत्नी ने किसी रिश्तेदार व अन्य परिचित को इसका अहसास नहीं होने दिया। आर्थिक तंगी में परिवार में भले ही अक्सर कलह भी होती थी लेकिन अंशु बाला परिवार को चलाने के लिए टीचिंग के साथ ट्यूशन पढ़ाकर गुजर बसर रही थी।
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वारदात के बाद बिल्डिंग के बाहर इकट्ठा लोग
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अंशु बाला क्षेत्र के ही एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाती थी। शाम को कालोनी और आसपास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। इससे वह अपने बड़े बेटे प्रथिमेष को ही स्कूल भेज पाती थी। रुपये के अभाव में आकृति और आरव स्कूल नहीं जाते थे। दंपति के बीच अक्सर इसी बात को लेकर विवाद हुआ करता था, लेकिन फिर भी वह अपने बच्चों को खुश रखने की कोशिशों में लगी थी। उनकी हर जरूरत को पूरा करने की कोशिश करती थी।
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इंजीनियर का घर
- फोटो : अमर उजाला
वह अपने बच्चों को बेहद प्यार करती थी, घर की दीवारों पर तीनों बच्चों के फोटो भी लगा रखे थे। आठ अप्रैल जुड़वा बच्चे आकृति और आरव का जन्मदिन भी काफी धूमधाम से मनाया था। इसमें पड़ोसी रिश्तेदार सभी ने शिरकत की थी। आसपास के लोगों का कहना था कि प्रथिमेष पढ़ने में बहुत ही अच्छा था।
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पत्नी जिसकी की गई हत्या
- फोटो : अमर उजाला
मनोचिकित्सक का कहना
मनोचिकित्सक डा. सचिन शर्मा का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को ज्यादातर मानसिक रोगी ही अंजाम देते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी अपवाद होते हैं जो हालात से टूटकर निर्मम वारदात कर बैठते हैं। इस घटना में हत्या करने वाला अगर मनोरोगी नहीं है तो वह अपने हालात से अत्यंत दुखी होकर और बगैर सोचे समझे यह कदम उठाया है। कई बार दुखी आदमी को जब फैमिली व सोशल सपोर्ट नहीं मिलता है तो वह पागलपन कर बैठता है। इंदिरापुरम ऐसा इलाका है जहां लोग अपने गांव समाज छोड़कर यहां रहने आए हैं। इन्हें सामाजिक स्तर पर हर तरह की मदद की जरूरत होती है।