1984 सिख विरोधी दंगों में उम्र कैद की सजा पा चुके सज्जन कुमार ने आज अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का सियासी सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वह कैसे एक चायवाले से कांग्रेस सांसद बने पढ़ें उनका पूरा सफर...
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कोर्ट जाने के लिए अपने घर से निकलते सज्जन कुमार
- फोटो : ani
सज्जन कुमार ने शुरुआत में रेहड़ी पर चाय बेची और इसके बाद 70 के दशक से कांग्रेस में सक्रिय हुए। इस दौरान उनका कांग्रेस नेता संजय गांधी से संपर्क हुआ। सबसे पहले बाहरी दिल्ली के मादीपुर इलाके से सज्जन कुमार ने नगर निगम का चुनाव लड़ा और 1977 में पार्षद बने। कांग्रेस ने उन्हें 1980 में बाहरी दिल्ली से उम्मीदवार बनाया और सिर्फ 35 साल की उम्र में सांसद बने।
2004 में भारतीय राजनीति में उनके नाम दो रिकॉर्ड दर्ज हुए। पहला, तो देशभर में लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा मत पाने का रिकार्ड हासिल किया। वहीं, दिल्ली से सबसे अधिक मतों से चुनाव जीतने का रिकार्ड भी उनके ही नाम रहा। उन्हें आठ लाख से अधिक मत मिले थे। इन सबके बीच 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद पनपे दंगों की आंच उनके राजनीतिक करियर पर भी आई।
कांग्रेस ने सज्जन कुमार को टिकट नहीं दिया। इतना ही नहीं, सिख समुदाय की नाराजगी से बचने के लिये कांग्रेस ने 1989 में भी उन्हें टिकट नहीं दिया। 1991 में कांग्रेस ने बदले सियासी माहौल में एक बार फिर बाहरी दिल्ली संसदीय क्षेत्र से उन्हें टिकट दिया और वह दुबारा संसद पहुंचे। इस बीच सिख दंगों को लेकर चर्चा काफी गर्म रही। राजनीतिक पार्टियों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। 1993 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए और सज्जन के कई साथी विधानसभा में चुनकर आ गए, लेकिन बाद में 1996 के चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कृष्णलाल शर्मा के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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कोर्ट जाने के लिए अपने घर से निकलते सज्जन कुमार
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इस बीच अलग-अलग अदालतों में सज्जन कुमार के खिलाफ कई मामले दर्ज हो चुके थे। सीबीआई ने भी सज्जन कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर दिया था। नाजुक हालत देखते हुए 1998 और 1999 में एक बार फिर कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में उनका टिकट काट दिया। बावजूद इसके बाहरी दिल्ली में सज्जन का प्रभाव कम नहीं हुआ और 2004 में वे फिर से लोकसभा का टिकट पा गए। वर्ष 2009 के चुनावों में दंगो के मामले को लेकर सज्जन का टिकट कट गया लेकिन वे अपने भाई रमेश कुमार को टिकट दिलवाने में कामयाब रहे और उनको सांसद बनवा दिया।