14 साल पहले 29 नवंबर की वह शाम जब पूर्वांचल एके 47 की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। हत्या भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की हुई थी और आरोप बाहुबली मुख्तार अंसारी और उनके साथियों पर लगा था। 14 साल बाद फैसला आया तो मुख्तार और उसके साथियों को बरी कर दिया गया।
जानिए कौन है बाहुबली मुख्तार अंसारी और क्या है उनका पूरा इतिहास...
यूपी के गाजीपुर में जन्मे मुख्तार अंसारी का परिवार प्रदेश की सियासत से जुड़ा रहा है। मुख्तार के दादा अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। मुख्तार के पिता एक कम्युनिस्ट नेता थे। 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार अंसारी का नाम आया। हालांकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पुलिस नहीं जुटा पाई थी।
1990 का दशक मुख्तार अंसारी के लिए बड़ा अहम था। छात्र राजनीति के बाद जमीनी कारोबार और ठेकों की वजह से वह जरायम की दुनिया में कदम रख चुके थे। पूर्वांचल के कई जिलों में मुख्तार के नाम की तूती बोलने लगी थी। 1995 में मुख्तार अंसारी ने सियासत में कदम रखा। 1996 में विधानसभा का चुनाव हुआ तो वह चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंच गए। उसके बाद से वह लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं।
2002 के चुनाव में कृष्णानंद राय ने मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी को हरा दिया था। अक्तूबर 2005 में मऊ में हुई संप्रदायिक हिंसा में भी मुख्तार अंसारी पर लोगों को उकसाने का आरोप लगा। जिसके बाद मुख्तार ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
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बेटाें के साथ मुख्तार अंसारी
बसपा और सपा की राजनीति
2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए बसपा के टिकट पर वाराणसी से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा मगर वह भाजपा के मुरली मनोहर जोशी से हार गए। 2010 में मुख्तार अंसारी पर राम सिंह मौर्य की हत्या का आरोप लगा। मौर्य मन्नत सिंह नामक एक स्थानीय ठेकेदार की हत्या का गवाह था। इसी आधार पर बसपा ने दोनों भाइयों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। मुख्तार ने इसके बाद कौमी एकता दल का गठन किया। 2012 के चुनाव में मुख्तार और उनके भाई सिगबतुल्लाह अंसारी चुनकर विधानसभा पहुंचे।