यूपी काडर की चर्चित आईएएस अफसर बी. चंद्रकला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वह अपने किसी सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से नहीं बल्कि सीबीआई के छापों की वजह से चर्चा में आई हैं। बता दें कि अवैध रेत खनन मामले में गलत ढंग से पट्टे देने के आरोप में उनके लखनऊ स्थित आवास पर सीबीआई की छापेमारी जारी है। इस छापेमारी में सीबीआई अब तक काफी दस्तावेज जब्त कर चुकी है। जानिए कौन है तेज तर्रार आईएएस बी. चंद्रकला जिनके घर पर पड़े हैं सीबीआई के छापे...
जानिए कौन हैं आईएएस बी. चंद्रकला, जिनके घर पर पड़ा सीबीआई का छापा
2008 में आंध्र प्रदेश की मूलनिवासी बी. चंद्रकला नीरू ने आईएएस परीक्षा पास की थी जिसके बाद उन्हें यूपी काडर में पोस्टिंग दी गई। वह बुलंदशहर, हमीरपुर जैसे कई जिलों की डीएम रह चुकी हैं। बी. चंद्रकला का जन्म 27 सितंबर 1979 में फर्टिलाइजर सिटी, रामागुंडम, करीमनगर, आंध्र प्रदेश(अब तेलंगाना) में हुआ था। उनकी शिक्षा कोटी वुमेन्स कॉलेज, हैदराबाद से हुई है। वह अगस्त 2018 से स्टडी लीव पर हैं।
पहली बार सुर्खियों में कब आईं...
वह पहली बार तब सुर्खियों में आईं जब वह बुलंदशहर की डीएम नियुक्त हुईं। यहां डीएम रहते हुए उन्होंने एक स्थानीय ठेकेदार और अफसरों को जमकर लताड़ लगाई थी, जिसका वीडियो इतना वायरल हुआ कि बी. चंद्रकला घर-घर में पहचानी जाने लगीं। दरअसल उन्होंने नगरपालिका के विकास कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की जांच की थी। जांच के दौरान उन्होंने पाया था कि निर्माण कार्यों में जो ईंट, इंटरलॉकिंग टाइल्स और गिट्टी इस्तेमाल हो रही है वह घटिया और पुरानी है। इसी से नाराज चंद्रकला ने अफसरों की जमकर क्लास लगा दी थी।
उन्होंने अफसरों को लताड़ लगाते हुए कहा था कि शर्म करो, ये जनता के पैसे हैं। आपके घर का पैसा नहीं है। इस तरह आप लोगों को धोखा देते हैं। वेतन से पैसे कटवा दूंगी। सड़क बनती है और रातों रात उखड़ भी जाती है। सब सामान वापस करो। मैं पूरी रिपोर्ट शासन को भेजूंगी।
भाजपा भी कर चुकी है यूपी चुनाव के दौरान शिकायत
यूपी विधानसभा चुनाव के वक्त बी. चंद्रकला मेरठ के डीएम के पद पर तैनात थीं। उस वक्त भाजपा ने उनकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी। उन पर आरोप लगाया गया था कि वह पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही हैं और सत्ताधारी पार्टी की एजेंट के रूप में काम कर रही हैं। ये शिकायत मेरठ बीजेपी के महानगर अध्यक्ष की ओर से की गई थी। इसमें उनके ट्रांसफर की भी मांग की गई थी।