यमुनोत्री से निकलकर लंबी दूरी तय कर हरियाणा के रास्ते दिल्ली में आने वाली यमुना नदी में प्रदूषण का क्या स्तर है वह किसी से छिपा नहीं है। हम हर साल ही समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों व अन्य माध्यमों से आने वाली खबरों के जरिए यह देखते हैं कि यमुना की दिल्ली में क्या दुर्दशा है। यमुना नदी में तैरने वाला जहरीला झाग किस कदर नदी के स्वास्थ्य को साल दर साल बिगाड़ चुका है, यह तथ्य भी अब आम हो गया है। बीते साल छठ पूजा के लिए जिस तरह से सरकार की तरफ से यमुना के जहरीले झाग को पाइप के पानी से धोने का प्रयास हुआ था सभी ने देखा था। तमाम सरकारी योजनाओं के जरिए यमुना सफाई का दावा किया गया लेकिन हालत अब भी वैसी ही है।
यमुना सफाई की बड़ी पहल: क्या होता कोरोनेशन प्लांट जिसकी मदद से नदी को साफ करने का दावा कर रही दिल्ली सरकार, जानें विशेषता
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दरअसल कोरोनेशन एसटीपी से पानी एडवांस ट्रीटमेंट प्लांट में लाया जाएगा। इसके बाद यह पानी यमुना के जरिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा और 50-60 एमजीडी पानी पीने में इस्तेमाल हो सकेंगे। इस तरह कोरोनेशन एसटीपी से एक तरफ सीवर के साथ-साथ यमुना साफ होगी और दूसरी तरफ पीने के पानी में भी वृद्धि होगी। बुराड़ी में पहला कोरोनेशन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है और ओखला में इससे भी बड़ा प्लांट बनाया जा रहा है।
कोरोनेशन प्लांट की विशेषता
कोरोनेशन प्लांट अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, यह अपशिष्ट जल उपचार क्षमता को बढ़ाएगा। बड़े पैमाने पर दिल्ली में पानी के प्रदूषण पर लगाम लगाएगा।1- कोरोनेशन प्लांट को जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग और टीएसएस-10 मिलीग्राम प्रति लीटर के अपशिष्ट प्रवाह मानकों के साथ नई तकनीक से बनाया गया है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस हटाने के साथ-साथ कीट भी मारता है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नए मानकों के अनुरूप निर्धारित किया गया है। बिजली उत्पादन के प्रावधान के साथ, इस संयंत्र को चिरस्थाई बनाया गया है।
2- स्काडा प्रणाली से प्लांट की निगरानी होगी और डेटा भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। गाद एवं सीवेज के डी-वाटरिंग का प्रावधान है, जिससे इसे सुखाने वाले क्यारियों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। इसलिए यह नया प्लांट दूसरों से अधिक बेहतर काम करता है।
3- प्लांट में मेम्ब्रेन वाला गैस स्टोरेज टैंक भी बनाया गया है। इससे उत्पादित सामग्री को बेहतर तरीके से होल्ड करने के लिए मेंब्रेन-टाइप के गैस होल्डर्स का प्रावधान भी होगा। ये मेम्ब्रेन गैस होल्डर एनारोबिक डाइजेशन (अवायवीय पाचन) की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संयंत्र को लगातार व बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए बायोगैस उपलब्धता की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
प्लांट को लेकर क्या बोले सीएम
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को बुराड़ी में स्थापित कोरोनेशन प्लांट का निरीक्षण किया। यह 70 एमजीडी क्षमता का प्लांट पूरी तरह से ऑटोमैटिक है, इसमें स्काडर सिस्टम है, जिसके जरिए कोई भी बटन दबाकर कहीं भी पूरे प्लांट में किसी भी मशीन को चालू किया जा सकता है और किसी भी मशीन को बंद किया जा सकता है। इस कोरोनेशन एसटीपी से 70 एमजीडी पानी ट्रीट होकर निकल रहा है। इस पानी को और साफ किया जाएगा। इसके लिए जहांगीरपुरी ड्रेन की तरफ एक और एडवांस ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। इसके बाद पानी पल्ला लेकर जाया जाएगा और वहां पानी यमुना के जरिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आएगा। यह तकनीक सिंगापुर में इस्तेमाल की जाती है, वहां इसको न्यू वाटर कहते हैं। उसी आधार पर दिल्ली में भी हम इस्तेमाल कर रहे है।