दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा हत्याकांड में बुधवार को साकेत कोर्ट में आफताब पूनावाला का नार्को विश्लेषण परीक्षण करने की अनुमति मांगी थी लेकिन कोर्ट ने कुछ तकनीकी कारणों से इसकी इजाजत नहीं दी। अब इस पर 18 नवंबर को कोर्ट तय करेगा कि आफताब का नार्को टेस्ट होगा कि नहीं।
Aaftab Narco Test: क्या और कैसे होता है नार्को टेस्ट, सामने आएगी हर गुनाह की तस्वीर, खुलेंगे हत्या के हर राज
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वहीं पुलिस को सोमवार शाम तक शव के 35 टुकड़ों में से करीब 13 मिल गए हैं। सभी टुकड़े हड्डियों में रूप में मिल रहे हैं। आफताब पुलिस को ये कहकर गुमराह करता रहा कि झगड़ा होने के बाद श्रद्धा छोड़कर चली गई है। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने सच उगल दिया। आफताब को किसी तरह का पछतावा नहीं है। आरोपी युवक का कहना है कि दोनों एक-दूसरे पर संदेह करते थे। उसे शव को ठिकाने लगाने का आइडिया विदेशी क्राइम सीरियल डेक्सटर से आया था।
क्या होती है नार्को जांच
सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान एक मनोचिकित्सक पुलिस टीम के साथ जाएगा। परीक्षण में एक दवा का इंजेक्शन शामिल होता है जो व्यक्ति को संज्ञाहरण के विभिन्न चरणों में प्रवेश करने का कारण बनता है। यह एक कृत्रिम निद्रावस्था का चरण उत्पन्न करता है, जो एक व्यक्ति को कम हिचकिचाता है और ऐसी जानकारी प्रकट करने की अधिक संभावना होती है जो आमतौर पर चेतना की स्थिति में प्रकट नहीं होती है।
कैसे होती है जांच
नार्को जांच एक परीक्षण प्रक्रिया होती है, जिसमें शख्स को ट्रुथ ड्रग नाम से आने वाल ली एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है। खून में दवा पहुंचते ही आरोपी अर्धचेतन अवस्था में पहुंचता है। हालांकि कई मामलों में सोडियम पेंटोथोल का इंजेक्शन भी दिया जाता है। जांच के दौरान मौके पर फोरेंसिक एक्सपर्ट, मनोवैज्ञानिक और डॉक्टर होते हैं। इस दौरान अर्धमूर्छित आरोपी से जांच टीम अपने पैटर्न में सवाल पूछती है।
आफताब को किसी और ने तो नहीं किया था सहयोग?
पुलिस इस मामले की जांच में लगी है कि कहीं आफताब का सहयोग किसी और ने तो नहीं किया था। हालांकि आरोपी ने इस बात से इनकार किया है लेकिन पुलिस नार्को टेस्ट कर इस बात की भी जानकारी हासिल करने की कोशिश करेगी।