उन्नाव दुष्कर्म मामले में आरोपी बांगरमऊ के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और सह-आरोपी शशि सिंह को भारी सुरक्षा के बीच सोमवार को उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से लाकर दिल्ली की तीस हजारी अदालत के जिला न्यायाधीश व सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के समक्ष पेश किया गया। दोपहर दो बजे केस की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को रोहिणी जेल भेज दिया गया।
हालांकि पहले इन्हें तिहाड़ जेल भेजा जाना था, जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ जो फैसला बदला गया....
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kuldeep sengar
- फोटो : अमर उजाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट के बाहर पुलिस के साथ अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए थे। इस दौरान भारी संख्या में वकील भी मौजूद थे। कोर्ट में प्रवेश न मिलने के कारण वे बेहद नाराज दिखे। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को इस केस से संबंधित मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 28 जुलाई को हुई दुर्घटना की जांच एक हफ्ते में करने और 45 दिन में दुष्कर्म मामले की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था।
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अदालत ने उनके दो परिजनों को कोर्ट रूप में मिलने की अनुमति दी, लेकिन भारी भीड़ के कारण सेंगर की पत्नी और बेटा कोर्ट रूम में घुस ही नहीं पाए। मीडिया को कोर्ट रूम में घुसने के लिए पुलिस से काफी देर तक नोक-झोंक करनी पड़ी। किसी तरह की मनाही नहीं होने पर भी पुलिस मीडियाकर्मियों को कोर्ट रूम में घुसने नहीं दे रही थी।
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अदालत ने सेंगर और शशि सिंह के खिलाफ दुष्कर्म व अन्य आरोपों पर दलीलें सुनने के लिए बुधवार की तारीख तय की है। कोर्ट को बताया गया कि इस केस में सीबीआई की ओर से कौन वकील पेश होगा, इससे संबंधित कोई आदेश सुप्रीम कोर्ट से अभी प्राप्त नहीं हुआ है।
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मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि यह मामला मीडिया ट्रायल बन चुका है। मीडिया को केस की सुनवाई में आने की अनुमति दी गई है। इससे आरोपी का केस की निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित होगा। अदालत ने आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर व शशि सिंह की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया था। अदालत ने अन्य आरोपियों को 6 अगस्त को अदालत में पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट भी जारी कर रखा है।