वाराणसी के रहने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर अमन अग्रवाल का सपना था कि वह विदेश में नौकरी करें। इसके लिए पिता दिलीप राज अग्रवाल ने करीब पांच साल पहले वाराणसी से अपना कारोबार को दिल्ली में शिफ्ट करना शुरू किया था। इस दौरान परिवार समेत खुद भी फरीदाबाद की ग्रीनफील्ड कॉलोनी के बी-ब्लॉक में रहने लगे थे।
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क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : अमर उजाला
अमन परिवार का इकलौता चिराग था। विदेश में नौकरी करना उसका सपना था। अपने सपने को पूरा करने के लिए अमन ने दिनरात एक कर दिया थ। यही कारण था कि पिछले दिनों सिंगापुर की एक कंपनी से उसका कॉल लेटर भी आ चुका था। उसे वीजा भी मिल चुका था। 18 नवंबर को उसे सिंगापुर स्थित एक कंपनी में ज्वाइन करना था।
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विलाप करते हुए परिजन
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इससे पहले ही वह दिवाली की रात कार दुर्घटना में इस दुनिया को अलविदा कह गया। यह कहते-कहते उनके पिता के आंखों से आंसू की धार निकल पड़ी। उन्होंने बताया कि अमन पढ़ाई में काफी तेज था। पुणे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। वह अपने कॉलेज में टॉप-टेन में शामिल था। पुणे, मुंबई, चेन्नई में उसने विभिन्न कंपनियों में नौकरी की। अब विदेश में नौकरी का उसका सपना पूरा होने वाला था। इससे पहले वह रविवार रात को दिवाली पर अपने दोस्त व रिश्तेदारों से मिलने फुफेरे भाई प्रखर के साथ निकला था। इसके बाद वापस नहीं लौटा।
अंतिम बार हुई थी पिता से बात
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भीषण सड़क हादसा
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कार दुर्घटना में जान गंवाने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर अमन अग्रवाल देर रात तक घर नहीं लौटे थे। उनकी आखिरी बार पिता से बात हुई थी। करीब पौने एक बजे तक घर न पहुंचने पर पिता ने फोन कर बेटे से घर जल्दी आने के लिए कहा था। फोन कटने के बाद पिता को नींद आ गई थी। रात करीब ढ़ाई बजे अमन के जेब से मिले आधारकार्ड के पते पर ग्रीनफील्ड पहुंची पुलिस ने पिता को जगाया व अस्पताल लेकर पहुंचे। बेटे को इस हालत में देख कर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
अपनी कार छोड़ अमन के साथ गया था प्रखर
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विलाप करते हुए परिजन
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सिंगापुर जाने से पहले अमन अपने दोस्तों व रिश्तेदारों से मिलना चाहता था। उसने फोन कर ममेरे भाई प्रखर को बुलाया। प्रखर ने अपनी होंडा इमेज कार को ग्रीनफील्ड में खड़ी कर अमन के साथ होंडा सिटी कार में निकला था।