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खुद पुलिस ही तोड़ने लगे अगर नियम तो कैसे सुधरेगा शहर

Thu, 17 Aug 2017 06:24 PM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 17 Aug 2017 06:24 PM IST
सार

1.60 लाख चालान, 3 करोड़ जुर्माना, नतीजा 0 
- पुलिस के सख्ती के बाद भी नहीं सुधरे ट्रैफिक के हालात  
 

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traffic rules are break by police itself in faridabad,
traffic rules - फोटो : अमर उजाला

ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर जिले की ट्रैफिक पुलिस ने छह महीने में 1.60 लाख वाहनों के चालान काटकर नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। छह माह में तीन करोड़ रुपयेे से ज्यादा जुर्माना भी वसूला। ट्रैफिक पुलिस भले ही आंकड़ों की इन बाजीगरी में पास हो गई हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सड़कों पर ट्रैफिक के हालात बद से बदतर हो गए हैं। सड़कों के लिए नासूर बनी अवैध पार्किंग का मकड़जाल अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है। शहर की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों को मानना तो दूर बल्कि लोग इनकी परवाह तक करना मुनासिब नहीं समझते।

traffic rules are break by police itself in faridabad,
traffic rules - फोटो : अमर उजाला

नो पार्किंग का ‘नॉनसेंस’  
नो पार्किंग में वाहन खड़ा करना शहर के लोगों की आदत में शुमार हो गया है और ट्रैफिक पुलिस महज चालान काटकर रेवेन्यू बढ़ाने में लगी है। बीते साल से ज्यादा चालान नो पार्किंग के काटे गए, लेकिन फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर की प्रमुख सड़कों पर अवैध पार्किंग का सिलसिला अब भी जारी है।

traffic rules are break by police itself in faridabad,
traffic rules - फोटो : अमर उजाला

हेलमेट से परहेज क्यों
ट्रैफिक पुलिस सालभर यातायात जागरुकता व चेकिंग अभियान चलाती रही। छह महीने में ही 64 हजार से ज्यादा दुपहिया चालकों के चालान काट दिए गए, लेकिन फिर खुलेआम ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। हेलमेट लगाने की जरूरत दुपहिया चलाने वाले नहीं समझते। इतना ही नहीं ट्रिपल राइडिंग का चलन भी खूब देखा जा रहा है। 
मोबाइल थामें या स्टेयरिंग 
एक हाथ  में स्टेयरिंग और एक हाथ में मोबाइल, नतीजा चाहें कुछ भी हो। ऐसा नजारा शहर की सड़कों पर कभी भी दिख सकता है। आंकड़ों की मानें तो एक हजार से ज्यादा वाहन चालक मोबाइल का प्रयोग करते पकड़े गए लेकिन जुर्माना राशि कम होने के कारण वाहन चलाते वक्त मोबाइल फोन का प्रयोग खुलेआम हो रहा है।

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traffic rules - फोटो : अमर उजाला

सीट बेल्ट तो भूल जाओ
शहर की सड़कों पर दौड़ रहे 80 फीसदी कार सवार सीट बेल्ट नहीं लगाते। फरीदाबाद की सरहद में घुसते ही सीट बेल्ट उतार दी जाती है। हालांकि, हर किसी पर कार्रवाई नहीं हो पाती, लेकिन सालभर के आंकड़ों पर गौर करें तो तकरीबन 20 हजार लोग सीट बेल्ट का प्रयोग करते नहीं पाए गए।
इनकी भी सुनिए
हमारी पूरी कोशिश है कि शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का फ्लो बना रहे और दुर्घटनाओं में कमी आए। इसके लिए लोगों में जागरुकता भी बेहद जरूरी है। वाहन चलाते समय जिम्मेदारी समझकर नियमों का पालन करना चाहिए।-हेमंत कुमार, एसएचओ ट्रैफिक
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाने की बड़ी जरूरत है। महकमों को पब्लिक के साथ मिलकर सुधार की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। शहर की संस्थाएं इसके लिए तैयार हैं लेकिन सरकारी मशीनरी सहयोग मांगे तो सही।-संदीप सिंघल, रोटरी क्लब
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर में ट्रैफिक के हालात खराब हैं। मैनपावर की कमी के साथ ही सरकारी तंत्र में इच्छाशक्ति की कमी है। ट्रैफिक व्यवस्था में  ईमानदारी के साथ सुधार लाने की जरूरत है।-एसके शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन

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traffic rules - फोटो : अमर उजाला

सबसे ज्यादा टूटे यह नियम 
ट्रैफिक रूल         चालानों की संख्या
बिना हेलमेट        64472 
सीट बेल्ट         19663 
नो पार्किंग         8116 
ट्रिपल राइडिंग        6172 
बिना ड्राइविंग लाइसेंस    8629 
विपरीत दिशा        5098

बढ़ रहा हादसों का ग्राफ 
-324 सड़क हादसे हुए थे पिछले वर्ष शहर की सड़कों पर 
-317 हुई इस बार छह महीने में ही सड़क हादसों की संख्या

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