निर्भया के दोषियों की फांसी के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे ही उनके साथ-साथ जेल प्रशासन का तनाव भी बढ़ता जा रहा है। दोषियों ने जहां खाना-पीना कम कर दिया है तो वहीं जेल प्रशासन चारों दोषियों की सेहत पर खास नजरें टिकाए है।
डॉक्टरों से सुबह शाम उनकी जांच कराई जा रही है। वहीं उनके बैरक में पुलिस के चुनिंदा जवानों को ही जाने की अनुमति है। हालात यह है कि बैरक के बाहर गश्त करने वाले से लेकर खाना देने वालों तक को फांसी से जुड़ी कोई भी बात या उनका जवाब नहीं देने की हिदायत दी गई है।
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सूत्रों के अनुसार अब जेल के अधिकारी भी इनकी फांसी को लेकर तनाव में हैं। फांसी की सजा को लेकर दोषियों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है और उन्हें लगता है कि अब किसी भी दिन उनकी फांसी का फरमान जारी हो सकता है। खाना-पीना कम करने की वजह से उनका वजन कम हो रहा है। ऐसी स्थिति में दोषियों को सही-सलामत रखने की जिम्मेदारी जेल अधिकारियों पर है।
दोषियों के एक गलत कदम से अधिकारियों पर बड़ा सवाल उठ सकता है। इसलिए अधिकारी भी इनको लेकर तनाव में हैं। दोषियों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
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तमिलनाडु स्पेशल पुलिस की टीम दो-दो घंटे की शिफ्ट में उन पर नजर रख रही है तो वहीं अधिकारियों की भी उन पर लगातार नजर है। यहां तक कि वह जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे के जरिए उनकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है।