अगले 24 घंट से भी कम समय में ये पता चल जाएगा कि गुजरात में पिछले 22 साल से सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से चुनाव जीत पाएगी या नहीं। आजादी के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस के अलावा किसी पार्टी को लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ। इसका पूरा श्रेय बीजेपी के करिश्माई नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जाता है। मोदी ने एक चुनौती के तौर पर अचानक गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2001 में सत्ता संभाली और प्रधानमंत्री बनने तक राज्य में उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सका। यही कारण है कि गुजरात के चुनाव परिणाम पर पूरे देश की निगाह है। एक्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं लेकिन असली नतीजे सोमवार सुबह से आने शुरू हो जाएंगे। चुनाव के खात्मे और परिणाम आने के बीच हम आपको बता रहे हैं वो बातें जो बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती हैं...
गुजरात चुनाव परिणाम से पहले ये 4 चीजें बीजेपी को पहुंचा सकती हैं भारी नुकसान
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गुजरात चुनाव में क्यों कांग्रेस को होगा फायदा
(1) नोटबंदी से छोटे किसान व व्यापारी नाराज: एक साल पहले काले धन पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच सौ और हजार के पुराने नोट को चलन से बाहर कर दिया और उसके बदले नए नोट जारी किए। नोटबंदी की इस प्रक्रिया का पूरे देश पर व्यापक असर हुआ। आम आदमी से लेकर बड़े व्यापारी तक को इस फैसले से उबरने में वक्त लगा। माना जा रहा है कि इससे गुजरात में व्यापारियों और छोटे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा जिसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है।
(2) जीएसटी की जटिल प्रक्रिया से मैन्यूफैक्चरर्स नाराज: नोटबंदी के छह महीने बितते-बितते केंद्र सरकार ने पूरे देश में समान कर प्रणाली वाला जीएसटी कानून लागू कर दिया। इस प्रक्रिया की जटिलता के चलते भी व्यापारियों और उत्पादन करने वाले व्यापारियों के लेन-देन पर नकारात्मक असर पड़ा। खुद केंद्र सरकार ने भी इस समस्या को समझते हुए जीएसटी कानून में कई बदलाव किए। केंद्र सरकार के इस कठोर फैसले का नुकसान बीजेपी को गुजरात चुनाव में देखने को मिल सकता है।
(3) गुजरात मॉडल से लाभान्वित और वंचितों के बीच टक्कर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी ने गुजरात मॉडल को विकास के पर्याय के तौर पर पूरे देश में प्रचारित किया । ये बताने की भी कोशिश की गई कि गुजरात ने डेवलपमेंट का नया मॉडल पूरे देश के सामने पेश किया है जो विरोधी पार्टियों के लिए सबक है। हालांकि, माना जा रहा है कि गुजरात में एक तबका ऐसा भी है जिसको गुजरात मॉडल से फायदा होने की जगह नुकसान ही हुआ है। इस तबके को एक समुदाय विशेष से जोड़ कर भी पेश किय जा रहा है।
(4) तीन करिश्माई नेता भाजपा से नाराज: गुजरात में तीन युवा और उभरते नेता न सिर्फ बीजेपी के खिलाफ हैं बल्कि, कांग्रेस का साथ दे रहे हैं। जिग्नेश मेवानी, अल्पेश ठाकोर और हार्दिक पटेल पूरे चुनाव के दौरान बीजेपी के खिलाफ प्रचार करते रहे और इस दौरान इन तीनों नेताओं की रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों का आना भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।