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'जिस दिन प्रधानमंत्री बनूंगी, उस दिन बेटियों के हक के लिए बदलाव लाउंगी'

Tue, 05 Jul 2016 08:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 05 Jul 2016 08:30 PM IST
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The day become prime minister, the day shift to the right of daughters
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका - फोटो : अमर उजाला
मैं जिस दिन प्रधानमंत्री बनूंगी, उस दिन बेटियों के हक के लिए बदलाव लाउंगी। बेटियों को बंदिशों में बांधने की बजाय समाज बेटे को महिलाओं की इज्जत करने की सीख दें तो शायद फिर कभी कोई परिवार बेटी को घर से बाहर भेजने या बेटे की तर्ज पर आजादी देने के नाम पर ना-नुकर नहीं करेगा।
The day become prime minister, the day shift to the right of daughters
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका - फोटो : अमर उजाला

बेटियों को इसलिए आजादी नहीं मिलती है, क्योंकि भारतीय समाज की धारणा है कि बेटियों या महिलाएं घर की इज्जत होती है। कोई उन्हें कुछ कह दें तो बदनामी होगी। इससे ही भेदभाव शुरू होता है और इसी माइंडसेट को बदलने की जरूरत है। बेटी को एक मौका तो दें, सफल होकर आएंगीं। क्योंकि बूंद-बूंद से सागर बनता है।

The day become prime minister, the day shift to the right of daughters
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका - फोटो : अमर उजाला

यह बात यूनिसेफ की गुडविल एंबेसडर और अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने यूनिसेफ के फेयर स्टॉर्ट कार्यक्रम में अमर उजाला फाउंडेशन की बेटियों के सवालों के जवाब में कही। दिल्ली में यूनिसेफ ने फेयर स्टॉर्ट अभियान का आगाज किया। इस मौके पर फिल्म भी प्रदर्शित की गयी, जिसमें अमीर और गरीब परिवारों की महिलाओं व बच्चों के पालन पोषण से लेकर स्कूल जाने की कहानी बयां की गयी है।

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The day become prime minister, the day shift to the right of daughters
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका - फोटो : अमर उजाला

यूनिसेफ के फेयर स्टॉर्ट अभियान की तर्ज पर  अमर उजाला फाउंडेशन भी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को आगे बढ़ा रहा है। इसी के तहत अमर उजाला फाउंडेशन विभिन्न राज्यों की बेटियों को आगे बढ़ाने के सहयोग करेगा। इससे पहले यूनिसेफ के भारत में प्रतिनिध लूइस जार्ज ने बताया कि ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 61 लाख बच्चे बीच में स्कूल छोड़ चुके हैं। करीब एक करोड़ बच्चों का बचपन मजदूरी में दब गया है।

 

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The day become prime minister, the day shift to the right of daughters
अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम में प्रियंका - फोटो : अमर उजाला

वहीं, 3,500 बच्चे रोजाना 5 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मर जाते हैं। जबकि औसतन 22.2 लाख लड़कियों की हर साल जल्दी शादी कर दी जाती है। यूनिसेफ  की आम बच्चों के लिए रोल मॉडल छात्रा मीरा भी इस अवसर पर मौजूद थी। मीरा ने कहा कि बेटियों को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन बेटियों में आत्मविश्वास जगाए बिना कुछ संभव नहीं है। यह आत्मविश्वास सिर्फ अभिभावक ही ला सकते हैं। बेटियों को पढ़ाना इसलिए भी जरूरी है कि बेटी पढ़ेगी तो परिवार आगे बढ़ेगा।

 

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