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मुन्ना बजरंगी की हत्याः 20 साल पहले एनकाउंटर ने बदल दी थी डॉन की जिंदगी, ऐसे रखा अंडरवर्ल्ड में कदम
Tue, 10 Jul 2018 10:38 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,नई दिल्ली
ब्यूरो,अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Jul 2018 10:38 AM IST
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Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
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...और इस बार चूक गया मुन्नी बजरंगी, हमेशा की तरह किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और उसकी मौत हो गई। जी हां ऐसे कई मौके आए जब मुन्ना बजरंगी पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब हो गया। 11 सितंबर 1998 को तो दिल्ली पुलिस व यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में लगभग उसे मार ही गिराया था।
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इस एनकाउंटर के बाद उसकी मौत की खबर भी टीवी पर चला दी गई, लेकिन मौत का मात देते हुए मुन्ना बजरंगी ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पहुंचते ही आंख खोल दी। इलाज के बाद उसकी जान तो बच गई, लेकिन एक गोली उसके दिल के पास हमेशा के लिए रह गई। डॉक्टरों ने उस गोली को निकाला नही। इधर 29 अक्तूबर 2009 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुंबई के मलाड से मुन्ना बजरंगी को दबोचा। तभी से वह अलग-अलग जेल में रह रहा था।
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दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूपी, बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश में मुन्ना बजरंगी की अपराधिक गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इस बीच 11 सितंबर 1998 में दिल्ली के एसीपी राजबीर सिंह व अन्यों को सूचना मिली कि मुन्ना बजरंगी मारुति इस्टीम कार से जीटी करनाल रोड के पास नंगली पूना के सामने अपने साथी के साथ आने वाला है। यूपी एसटीएफ भी इसमें शामिल हो गई।
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पुलिस की टीम ने दोनों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद आरोपियों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी। एसीपी राजबीर की टीम ने जवाबी गोलीबारी की, जिसमें मुन्ना का साथी यतिंदर सिंह मारा गया, जबकि मुन्ना को 11 गोली लगी।
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वहीं गोली बारी में दिल्ली पुलिस का सिपाही देवेंद्र सिंह जख्मी हो गया। इस हमले में लगभग मुन्ना को मरा हुआ समझकर पुलिस की टीम उसे आरएमएल अस्पताल लेकर गई, जहां उसकी सांस चल रही थी। बाद में उसकी जान बच गई। समयपुर बादली थाने में मामला दर्ज किया गया। कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया गया, बाद में वह जमानत पर छुट गया। लेकिन वह दुबारा कोर्ट नहीं गया, 20 मई 2002 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
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