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12 साल के एक बच्चे ने सुनाई अपराध की दुनिया की रोंगटे खड़ी कर देने वाली कहानी

Fri, 19 Jan 2018 10:45 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नर्ई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नर्ई दिल्ली Updated Fri, 19 Jan 2018 10:45 AM IST
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story of child trafficking tell by 12 year old

पीयूष सुरीन (बदला हुआ नाम)  एक 12 साल का बच्चा है जिसे नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड से दिल्ली लाया गया। इसके बाद उसे पश्चिमी दिल्ली के एक आपराधिक गिरोह को बेच दिया गया। जल्द ही उसे टीम का हेड बना उसी की तरह लाये गए अन्य बच्चों को प्रशिक्षित करने को कहा गया। इन बच्चों को रोज 500 रूपये लाने को कहा जाता है जिसके बदले इन्हें खाना और रहने के लिए जगह दी जाती है। उन्हें कब्जे में रखने के लिए यातनाएं दी जाती हैं जिसमें सिगरेट से जलाना, पीटना, चाकुओं से वार और भूखा रखा जाना शामिला है।

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झारखंड के पीयूष को स्थानीय लोगों ने तब पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जब वह दो पहिया वाहन सवार एक महिला का पर्स छीनने की कोशिश कर रहा था। वह एक प्रशिक्षित चोर है, जो पश्चिमी दिल्ली के व्यस्त इलाकों से मोबाइल और पर्स आदि चुराता है। जांच के दौरान यह पता चला कि 10-12 की उम्र में यह काम करने वाला वह अकेला बच्चा नहीं है। उसने ही पुलिस को बताया कि उन सभी की तस्करी कर उन्हें झारखंड से दिल्ली लाया गया था। 

story of child trafficking tell by 12 year old

उसने कहा कि उन्हें 30,000 रूपये प्रति माह की नौकरी का झांसा देकर दिल्ली लाया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मानव तस्करी में लगे ये गिरोह बच्चों को चोरी करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार भारत में साल 2016 में मानव तस्करी के करीब 8000 मामले दर्ज हुए थे। साथ ही 23,000 पीड़ित जिनमें 182 विदेशी भी शामिल थे को बीते सालों में बचाया भी गया।
 

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मानव तस्करी को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहे गैर सरकारी संगठनों का कहना है कि मानव तस्करी गिरोह सबसे ज्यादा झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में सक्रिय है जो दिल्ली और बाकी मेट्रो शहरों के गिरोह से मिले हुए हैं। NGO ने आगे कहा कि बच्चों को वेश्यावृत्ति और बाल मजदूरी में लगाने के अलावा उन्हें अपराध से जुड़े गिरोह को बेच दिया जाता है। 

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story of child trafficking tell by 12 year old

10-14 वर्ष के जिन बच्चों को उनके जानकारों द्वारा रांची से दिल्ली लाया जाता है उन्हें तकरीबन एक महीने तक लक्ष्मी नगर, गोविंदपुरी जैसे इलाकों में बंदी कर रखा जाता है और पर्स, मोबाइल और बैग चुराने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उन्हें बताया जाता है कि वो किसे शिकार बना सकते हैं और कैसे। बच्चों को मॉल, बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले एरिया में भी भेजा जाता है। फिर उन्हें लक्षित स्थानों में 2-3 लोगों के ग्रुप में भेजा जाता है। वहां एक व्यक्ति उनपर नजर रखता है ताकि वह भाग ना पाए। जहां इस बात का ध्यान भी रखा जाता है कि बच्चों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। 

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