दिल्ली के राज्यपाल अनिल बैजल से बैठक के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों के स्कूल बसों और एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए राजी होने की सूचना आई थी, लेकिन इससे अब साफ इनकार कर दिया गया है। प्रदर्शन भी धड़ों में बंटा दिखा।
शाहीन बागः प्रदर्शनकारी महिलाओं का दावा, कुछ लोग दादियों को बहलाकर-फुसलाकर ले गए एलजी से मिलवाने
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कुछ महिलाओं ने दावा किया कि एलजी से मिला प्रतिनिधिमंडल आधिकारिक नहीं था। मंगलवार रात प्रेस वार्ता बुलाकर इसकी जानकारी दे दी गई थी। इनका कहना था कि पुलिस की ओर से भेजे गए कुछ लोग अपने पसंदीदा लोगों को एलजी के पास ले गए। प्रदर्शन में शामिल दादियों को भी बहला-फुसलाकर ले जाया गया। दूसरी ओर, प्रदर्शन में मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि एलजी से मिलकर मसले का कोई हल निकलता है तो मुलाकात में कोई बुराई नहीं है। एलजी के सड़क खोलने के आग्रह को भी इन्होंने ठुकरा दिया।
शाहीन बाग में मौजूद साजिद मोजिब ने कहा कि कई दिन से पुलिस सड़क खोलने के लिए महिलाओं व प्रदर्शनकारियों पर दबाव बना रही है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने प्रदर्शनकारियों से मिलने की इच्छा जताई तो पुलिस अधिकारियों ने चुपचाप कुछ लोगों को तैयार कर लिया। दादियों को भी ले जाया गया। साजिद ने दावा किया कि जो लोग कल (बुधवार) एलजी से मिले हैं, उनका प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। मंगलवार रात को प्रेसवार्ता में कहा गया था कि कुछ लोग पुलिस व सरकार से मिलकर प्रदर्शन खत्म कराना चाहते हैं, वही एलजी से मिलने गए थे।
प्रदर्शन में शामिल शाहीन कौसर ने भी दावा किया कि स्कूली वैन, बसों और एंबुलेंस को यहां से पहले से ही निकाला जा रहा है। बृहस्पतिवार को रोड खोलने की कोई व्यवस्था नहीं है। मंगलवार देर रात प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद भी पहुंचे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने से निराशा
प्रदर्शन में बैठी ज्यादातर महिलाओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर उन्हें पूरा यकीन है। कोर्ट उनके हक में फैसला देगा। सुनवाई चार हफ्ते टलने की बात से उन्हें थोड़ी निराशा हुई है, लेकिन हौसला नहीं टूटा है। सीएए की वापसी तक प्रदर्शन जारी रहेगा।