दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत में रविवार को आसमान से आग बरसी और सोमवार को प्रकृति का ये कहर जारी रहा। तेज धूप और गर्म हवा के बीच दिल्ली के पालम केंद्र पर रविवार को तापमान 47 डिग्री तक जा पहुंचा। जिसने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। पालम में अब तक का रिकॉर्ड 9 जून, 2014 के नाम 47.8 डिग्री के साथ दर्ज है, जबकि 1 जून, 2012 को तापमान 47 डिग्री दर्ज हुआ था। दिल्ली के साथ-साथ मैदानी इलाकों में खूब लू चली, जो सोमवार को भी जारी रही। नोएडा में भी पारा 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
दिल्ली के सफदरजंग मानक केंद्र पर तापमान सामान्य से 4 डिग्री ऊपर 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। रात की गर्मी ने भी लोगों को खूब परेशान किया। न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री ऊपर 30.4 डिग्री दर्ज किया गया। हवा में नमी न्यूनतम 15 फीसदी और अधिकतम 45 फीसदी रही, जिस कारण दोपहर में घर से बाहर निकलने वालों को गर्म हवाओं ने अधिक परेशान किया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हाई वोल्टेज में चल रही गर्मी के बाद 6 जून से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर पश्चिम भारत का मौसम बदलेगा। पहाड़ों पर आंधी-बारिश के साथ ओले पड़ेंगे, तो मैदानी इलाकों में बिजली चमकने के साथ बारिश भी होगी। इससे 6 जून से तापमान में गिरावट शुरू होगी। दिल्ली में अभी 45 डिग्री के आसपास दर्ज हो रहा तापमान 8 जून को 35 डिग्री दर्ज होगा। वहीं, न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। 7 से 10 जून के बीच अधिकतम तापमान 35-38 डिग्री के बीच रहेगा।
गर्मी और लू से इन दिनों लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को हो रही है। इस मौसम में किडनी और लिवर संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। तेज धूप की वजह से पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे गुर्दे की पथरी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। अधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी से अंगों के फेल होने का भी खतरा रहता है। आंखों में कंजेक्टिवाइटिस का भी डर रहता है।
वेंकटेश्वर अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की सीनियर कंसलटेंट डॉ. चारु गोयल सचदेवा ने बताया कि अधिक गर्मी से शरीर में तापमान को नियंत्रित करने वाले सिस्टम के फेल होने का खतरा रहता है। गर्मी से किडनी, लिवर और हृदय रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। शरीर में पानी की कमी होने से यूरिन कम मात्रा में निकलता है और यूरिन का रंग भी पीला होने लगता है। इसकी वजह से गुर्दे की पथरी होने का खतरा रहता है। हेपेटाइटिस के मरीजों के लिए भी इतनी गर्मी खतरनाक होती है।