प्रद्युम्न हत्याकांड में आरोपी छात्र के साथ वयस्क के तरह व्यवहार किया जाए या नाबालिग की तरह। इस मामले में पेंच फंस सकता है। नए जुवेनाइल जस्टिस कानून में यह अधिकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को दिया गया है।
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- फोटो : सुदर्शन झा
2016 में संशोधित किए गए जुवेनाइल जस्टिस कानून में गंभीर अपराध में संलिप्त किशोर पर सामान्य अदालत में बालिग की तरह मुकदमा चलाने का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसे तय करने का अधिकार जेजे बोर्ड को ही दिया गया है।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
बता दें कि 08 सितंबर को हुए प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआई द्वारा हिरासत में लिए गए 11वीं कक्षा के छात्र के साथ सामान्य वयस्क के तरह केस चलाने की मांग प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने की है। इस मामले में उन्होंने वकील सुशील टेकरीवाल के सामने याचिका भी डाली है।
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- फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला
कानून विशेषज्ञों की कहना है कि नए कानून के तहत बोर्ड आरोपी किशोर की मानसिक क्षमता यानी अपराध की प्रकृति और परिणामों के प्रति उसकी समझ, अपराध की परिस्थितियां और मंशा आदि जांचने के बाद यह फैसला करेगा कि मुकदमा बोर्ड में चलना चाहिए या सामान्य अदालत में।
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प्रद्युम्न की हत्या कांड के आरोपी को फरीदाबाद बाल सुधार गृह में लाया गया ।
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सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील पीयूष तिवारी कहते हैं कि बोर्ड सभी परिस्थितियों का आकलन करेगा। जिस बच्चे की हत्या की गई, उससे आरोपी की कोई दुश्मनी नहीं थी।