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अस्पताल से झूठ बोलकर विदेश घूमने पहुंचे सरकारी डॉक्टर, फेसबुक ने मुश्किल में डाली नौकरी

Sat, 13 Jan 2018 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 13 Jan 2018 01:22 PM IST
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rml hospital doctor visit egypt by telling a lie to hospital, fb revealed all his false
rml doctor - फोटो : अमर उजाला

सर्जिकल सामान बेचने वाली कंपनियों के ऑफर पर मरीजों को छोड़ डॉक्टरों के विदेश घूमने पर पाबंदी नहीं लग पा रही है। कुछ वर्षों से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार इस तरह की गतिविधियों को आपराधिक मानते हुए सख्ती कर रहा है।

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मंत्रालय के ही डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के एक विभागाध्यक्ष ने इन नियमों को ताक पर रख दिया। प्रबंधन से झूठ बोलकर वे मिस्र देश की सैर करने पहुंच गए। साथ गए साथियों में से एक की चूक उन्हें भारी पड़ गई।
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फेसबुक पर पोस्ट की गई एक तस्वीर में डॉक्टर मिस्र पिरामिड के सामने बैठे हैं और उनके पास आरएमएल में ही घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के लिए सर्जिकल सामान देने वाली कंपनी का प्रतिनिधि मौजूद है। यह फोटो डॉक्टर के अस्पताल आने से पहले ही वायरल हो गया। इसके बाद प्रबंधन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए।
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दरअसल, आरएमएल के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र कुमार पर आरोप लग रहे हैं कि दिसंबर 2017 में प्रबंधन से झूठ बोलकर वे छुट्टियों पर निकल गए। उन्होंने प्रबंधन को इसके पीछे पारिवारिक कारण बताया।

rml hospital doctor visit egypt by telling a lie to hospital, fb revealed all his false
rml doctor - फोटो : अमर उजाला

चंद दिन बाद अस्पताल के ही छात्रों तक एक फोटो व्हाट्स ऐप के जरिये पहुंचा। धीरे-धीरे फोटो वरिष्ठ डॉक्टरों के पास पहुंचा तो इसे प्रबंधन तक पहुंचने में भी देरी नहीं लगी। चिकित्सा अधीक्षक ने तत्काल इस मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए।

बताया जा रहा है कि फोटो में विभागाध्यक्ष के साथ सर्जिकल सामान बेचने वाली कंपनी का प्रतिनिधि भी बैठा है। इस पर आशंका जताई जा रही है कि कंपनी की ओर से ही डॉक्टर घूमने गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की अनुमति जरूरी
चिकित्सा जगत में प्राइवेट कंपनियों की दखलंदाजी रोकने और विदेशी यात्राओं का ऑफर सिस्टम खत्म करने के लिए सरकार ने नियम सख्त कर रखे हैं। इनके तहत कोई डॉक्टर परिवार के साथ भी विदेश जाता है तो स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुमति लेना आवश्यक है। सीएमई या कार्यशाला के लिए भी इजाजत जरूरी है। इसके बाद भारत सरकार के खर्चे पर वह विदेश जा सकता है। आरएमएल के वरिष्ठ विभागाध्यक्ष के मामले में ऐसी कोई मंजूरी नहीं ली गई है। 

और भी डॉक्टर हैं साथ

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बताया जा रहा है कि फेसबुक पोस्ट में पांच लोग दिखाई दे रहे हैं। इनमें विभागाध्यक्ष के अलावा कंपनी का प्रतिनिधि और अन्य डॉक्टर मौजूद हैं। बाकी के सभी डॉक्टर दिल्ली में प्राइवेट अस्पतालों में तैनात बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि निजी कार्यों के चलते भी विभागाध्यक्ष मिस्र गए थे तो उन लोगों के वहां होने का कोई औचित्य ही नहीं बनता।

‘शैक्षिक सम्मेलन के लिए गया था’
मुझ पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। मैं एक शैक्षिक सम्मेलन के लिए वहां गया था। मेरे साथ एम्स और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डॉक्टर भी थे। वहां जाने से जुड़ी तमाम कागजी कार्रवाई भी की थी।-डॉ. राजेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष, हड्डी रोग विभाग, आरएमएल

10 दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
यह मामला मेरे संज्ञान में है। जानकारी मिलने के बाद तत्काल विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए थे। विजिलेंस को जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दस दिन का वक्त भी दिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. प्रो. वीके तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक, आरएमएल अस्पताल

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