भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पांच राफेल विमानों का पहला बैच आज अंंबाला के एयरफोर्स बेस पहुंच गया है। इन पांचों विमान को भारतीय वायुसेना के पायलट लेकर आए हैं। इन पायलटों की टीम में एक पायलट गुरुग्राम के रोहित कटारिया भी हैं। आगे जानें पायलट रोहित के बारे में खास बातें....
गुड़गांव के रोहित कटारिया फ्रांस से लाए राफेल विमान, अंबाला पहुंचते ही ग्रुप कैप्टन के पद पर मिली पदोन्नति
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सेक्टर-56 के देवेंद्र विहार निवासी रोहित कटारिया डेढ़ साल तक पेरिस में प्रशिक्षण लेने के बाद बुधवार को राफेल विमान लेकर अंबाला पहुंचे। यहां पहुंचते ही उन्हें ग्रुप कैप्टन की कमान सौंप दी गई। यह पदोन्नति उन्हें करीब तीन महीने पहले मिली थी। विदेश में होने के कारण यह लागू नहीं हो सकी थी।
पिता कर्नल सतबीर सिंह साल 2012 में कपूरथला स्थित सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हुए थे। माता राजमति गणित की अध्यापिका पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। सतबीर सिंह ने बताया कि रोहित की छोटी बहन ऋतिका डेंटल सर्जन हैं। एक जनवरी 1982 को गुरुग्राम के गांव बसई में जन्में रोहित व उनकी बहन ऋतिका की पढ़ाई सैनिक स्कूल से हुई।
12वीं करने के बाद साल 1999 में रोहित एनडीए में चले गए। यहां रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। एयरफोर्स में रहते हुए रोहित को सभी लड़ाकू विमान सुखोई, मिराज, तेजस, मिग-21, जगुआर उड़ाने का अनुभव है। अब राफेल लाने के लिए उनकी तैनाती डेढ़ साल पहले पेरिस की गई थी।
यहां फ्रांस एयरफोर्स ने उन्हें राफेल उड़ाने का प्रशिक्षण दिया। करीब तीन महीने पहले उन्हें ग्रुप कैप्टन के तौर पर पदोन्नत कर दिया गया था, लेकिन नियमों के अनुसार यह पदोन्नति रोहित के भारत लौटने पर ही की जानी थी। बुधवार को राफेल के साथ जब वह अंबाला पहुंचे, तो पदोन्नति के आदेश लागू हो गए।
सतबीर सिंह ने बताया कि रोहित की बहन ऋतिका ने आर्मी कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस से पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में वे लोग बेटी के घर ग्वालियर में हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए गर्व का अनुभव है। अंबाला एयरबेस से वह परिवार से मिलने के लिए अपनी बहन के घर ग्वालियर जाएंगे।