दहेज के झूठे आरोप लगाना व आत्महत्या की धमकियां देना पति ही नहीं ससुराल के पूरे परिवार के प्रति क्रूरता है। इसके अलावा पति का समाज में चरित्र हनन, सम्मान व प्रतिष्ठा नष्ट करना उस पर गंभीर हमले के समान है। यह आरोप अत्यंत क्रूरता की श्रेणी में आता है। यह तलाक का ठोस आधार है।
'तकिया पर लौंग इलायची और अखरोट रख सोती थी पत्नी, पति का किया चरित्र हनन'
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दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में पत्नी की दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। महिला ने पति को क्रूरता के आधार पर तलाक प्रदान करने संबंधी पारिवारिक विवाद मामले के फैसले को चुनौती दी थी। खंडपीठ ने कहा कि सभी तथ्यों साक्ष्यों को देखने से स्पष्ट है कि इस मामले में पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं था।
वह ससुराल पक्ष का ही नहीं घर में आने वाले मेहमानों का भी अपमान करती थी। वह तांत्रिक क्रिया में लिप्त रहती थी और रात को दीया जलाकर पूजा करने के अलावा तकिया पर लौंग, इलायची, अखरोट रखकर पूजा, आटे का पुतला बनाकर उसे यमुनाजी में विसर्जित करती थी। इसी प्रकार पत्नी ने पति व ससुराल पर दहेज प्रताड़ना, पूरे परिवार पर शारीरिक व मानसिक क्रूरता का आरोप लगाया।
उन्हें मिट्टी तेल डाल कर आत्महत्या की धमकियां दी। पति पर पहली पत्नी को मारने का आरोप लगाया। अदालत ने कहा कि गांव में नवविवाहिता की अप्राकृतिक मौत गुप्त नहीं रह सकती। ऐसी मौत चर्चा का विषय बन जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह पति ही नहीं पूरे ससुराल पक्ष के प्रति क्रूरता है।
महिला ने पति पर विवाह, विवाहेत्तर संबंध का आरोप लगाया लेकिन कोई साक्ष्य या महिला का नाम नहीं बताया, मात्र कहा कि उसके एक शिक्षिका से संबंध है। वह शराबी है। अदालत ने कहा कि यह पति के चरित्र, सम्मान, प्रतिष्ठा पर गंभीर हमला है। खंडपीठ ने कहा कि उक्त सभी तथ्य देखने के बाद स्पष्ट है दोनों का साथ रहना असंभव है और पति के मन में डर संभावित है। उनके बीच फिर से सामान्य वैवाहिक जीवन जीने की उम्मीद करना व्यर्थ है। ऐसे में वे तलाक मंजूर संबंधी फैसले को उचित मानते हुए महिला की याचिका को खारिज करते हैं।