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Delhi NCR News: भारत में जरूरत के मुकाबले महज 25-30 प्रतिशत कॉर्नियल ट्रांसप्लांट
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डोनर टिशू की कमी बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों ने आई-बैंक नेटवर्क मजबूत करने पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में हर साल करीब एक लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा समय में केवल 25 से 30 हजार मरीजों को ही यह सुविधा मिल पा रही है, यानी मात्र 25-30 प्रतिशत जरूरत पूरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कॉर्नियल सर्जरी की विशेषज्ञता व सुविधाएं पर्याप्त हैं, लेकिन उपयुक्त डोनर कॉर्निया की कमी सबसे बड़ी बाधा है।
41वें नेशनल आई डोनेशन फोर्टनाइट पर एक निजी अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता के साथ-साथ तेज कॉर्नियल रिट्रीवल, मजबूत आई-बैंक नेटवर्क, बेहतर टिशू इवैल्यूएशन और उपलब्ध डोनर टिशू के अधिकतम उपयोग पर ध्यान देना आवश्यक है।
पद्मश्री प्रो. डॉ. जीवन तितियाल ने कहा कि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस विजन लॉस के प्रमुख कारणों में शामिल है और ट्रांसप्लांट से कई मामलों में दृष्टि बहाल हो सकती है, लेकिन मरीजों को उपयुक्त डोनर टिशू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आई डोनेशन की अपील को केवल प्रतिज्ञा तक सीमित न रखकर, मृत्यु के बाद परिवार द्वारा समय पर आई बैंक से संपर्क, अस्पताल-आधारित रिट्रीवल सिस्टम और डोनर से रिसिपिएंट तक बेहतर समन्वय पर भी जोर देना होगा।
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विशेषज्ञों ने आई-बैंक नेटवर्क मजबूत करने पर दिया जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में हर साल करीब एक लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा समय में केवल 25 से 30 हजार मरीजों को ही यह सुविधा मिल पा रही है, यानी मात्र 25-30 प्रतिशत जरूरत पूरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में कॉर्नियल सर्जरी की विशेषज्ञता व सुविधाएं पर्याप्त हैं, लेकिन उपयुक्त डोनर कॉर्निया की कमी सबसे बड़ी बाधा है।
41वें नेशनल आई डोनेशन फोर्टनाइट पर एक निजी अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता के साथ-साथ तेज कॉर्नियल रिट्रीवल, मजबूत आई-बैंक नेटवर्क, बेहतर टिशू इवैल्यूएशन और उपलब्ध डोनर टिशू के अधिकतम उपयोग पर ध्यान देना आवश्यक है।
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पद्मश्री प्रो. डॉ. जीवन तितियाल ने कहा कि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस विजन लॉस के प्रमुख कारणों में शामिल है और ट्रांसप्लांट से कई मामलों में दृष्टि बहाल हो सकती है, लेकिन मरीजों को उपयुक्त डोनर टिशू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आई डोनेशन की अपील को केवल प्रतिज्ञा तक सीमित न रखकर, मृत्यु के बाद परिवार द्वारा समय पर आई बैंक से संपर्क, अस्पताल-आधारित रिट्रीवल सिस्टम और डोनर से रिसिपिएंट तक बेहतर समन्वय पर भी जोर देना होगा।
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