रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मरीज भटकते रहे लेकिन ज्यादातर मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। ज्यादातर मरीज को सुरक्षाकर्मी मुख्य द्वार से ही हड़ताल होने की बात कह लौटा दे रहे थे।
अमर उजाला संवाददाता पवन कुमार व फोटोग्राफर जी. पाल ने दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों का मुआयना कर हड़ताल व मरीजों की परेशानी का जायजा लिया। पेश है आंखों देखा हाल :
चिकित्सा सेवा पूरी तरह से ठप रही
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- फोटो : अमर उजाला
संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, समय सुबह 11 बजे : मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी अस्पताल में चिकित्सा सेवा पूरी तरह से ठप रही। यहां आपातकालीन सेवा पर भी गंभीर असर पड़ा। ओपीडी पूरी तरह से बंद थी कुछ विभागों के दरवाजे तक बंद थे जबकि कुछ विभागों में कुछ देर के लिए डॉक्टर आए लेकिन बिना मरीज देखे लौट गए।
ज्यादातर एमएलसी केस को देखा जा रहा था
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दिलीप ने बताया कि मां का इलाज कराने आए थे लेकिन बिना इलाज के ही लौट रहे हैं। उसका कहना था कि हड़ताल की जानकारी एक दिन पहले होती तो आता ही नहीं। अस्पताल में मौजूद सुरक्षाकर्मी आपातकालीन विभाग में भी उन्हीं मरीजों को जाने दे रहे थे जिनको पुलिस लेकर आ रही थी। ज्यादातर एमएलसी केस को देखा जा रहा था।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भी हड़ताल का गंभीर असर दिखा
डीडीयू अस्पताल, सुबह 11.30 बजे : पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर स्थित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भी हड़ताल का गंभीर असर दिखा। अस्पताल की रेजीडेंट डॉर्क्ट्स एसोसिएशन ने पूरी तरह से चिकित्सा सेवा ठप कर रखी थी। यहां का पंजीकरण काउंटर बिल्कुल खाली था। हड़ताल की सूचना की वजह से मरीज गेट से ही लौटने लगे थे।